13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Hapur news: मुहम्मद बिन कासिम और राजा दाहिर के बीच हुआ था गजवा युद्ध, गजवा-ए-हिंद पर उलमा ने कही ये बात

गजवा-ए-हिंद को लेकर तमाम तरह के विवाद उठते रहे हैं। गजवा-ए-हिंद शब्द इतिहास में कहां से आया। इसके मायने क्या हैं। आखिर गजवा-ए-हिंद है क्या। इसको लेकर इतिहास के जानकारों और उलमाओं ने अपने विचार रखे।

2 min read
Google source verification
muslim jalsa

Hapur news: मुहम्मद बिन कासिम और राजा दाहिर के बीच हुआ था गजवा युद्ध, गजवा-ए-हिंद पर उलमा ने कही ये बात

आजकल पड़ोसी देश के कुछ लोगों की ओर से इस हदीस को इस प्रकार प्रस्तुत किया जा रहा है जैसे इस्लाम के अनुसार कार्य करना उनके जीवन का मूल उद्देष्य है और उनकी नजर में पूरा इस्लाम धर्म ही गजवा-ए-हिंद बन गया है। कि इसके नाम पर हिन्दुस्तान से युद्ध किया जा रहा है। ऐसे विचार-प्रचार से भारत में हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा प्रभावित हो रहा है। देश के कुछ क्षेत्रों में अकारण नफरत और शत्रुता उत्पन्न हो रही है। ये बातें इतिहास के जानकार और उलमा रफीकुर्रहमान ने कहीं।
हापुड के दीनी मदरसे में इस्लाम और गजवा-ए-हिंद को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रो. रियाज ने कहा कि यदि इस्लाम का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाए और इसके सही अर्थ को समझने का प्रयास किया जाए तो आज जो लोग इसके आधार पर उत्पात और दंगों का वातावरण बनाने का कुप्रयास कर रहे हैं वह निराधार और मिथ्या है। इसलिए कि यह भविष्यवाणी चौदह सौ वर्ष पहले की है। विगत चौदह शताब्दियों में आधी से अधिक अवधि इस प्रकार बीती है कि इस देश पर मुसलमानों का शासन था।

उन्होंने कहा कि इन्हीं चौदह शताब्दियों में इस देश पर सैकड़ों हमले हुए। यदि गजवा-ए-हिन्द' जैसी धारणा का कोई ऐसा हमला था जो मुसलमानों के द्वारा हिन्दुस्तान पर होता तो फिर यह भविष्यवाणी सत्य हो चुकी होती। सिंघ में मुहम्मद बिन कासिम के द्वारा इस्लामी सत्ता भी स्थापित हो चुकी थी। उसके पश्चात महमूद गजनवी ने अनेक आक्रमण किए और फिर उसके पश्चात शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी ने दिल्ली सल्तनत स्थापित की। गौरी के बाद भारत पर हमले होते रहे और मुसलमानों ने अपने वतनी भाईयों के साथ मिलकर उनका मुकाबला किया। यदि इस हदीस का अर्थ यह है कि मुसलमानों का कोई समूह "हिन्द" पर आक्रमण करेगा तो प्रश्न यह उठता है कि हिन्दुस्तान पर होने वाला कौन सा हमला 'गजवा-ए-हिन्द के रूप में होगा?

कार्यक्रम में कारी फजलूर्रहमान ने कहा कि आम तौर पर हदीस की व्याख्या करने वाले उलेमा में से अधिकांश का मत है कि हदीस में जिस गजवे की भविष्यवाणी है वह गजवा हो चुका है और वह वही युद्ध है जो मुहम्मद बिन कासिम और राजा दाहिर के बीच हुआ था। उन्होंने कहा कि प्रश्न उठता है कि कुछ लोगों ने यह अवधारणा कैसे बना ली कि वर्तमान पाकिस्तान हिन्दुस्तान के अर्थ में नहीं और यह युद्ध हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के साथ होगा। जो लोग हिन्दुस्तान के विरुद्ध मोर्चाबंदी कर रहे हैं वह किसी प्रकार सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह बात याद रहनी चाहिए कि वर्तमान पाकिस्तान में कुछ अतिवादी तत्व अपने राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि हेतु इस प्रकार के कुप्रयास करते रहते हैं। जिससे हिन्दुस्तानी मुसलमान संकट में आ जाए। उन्होंने कहा इस देश का संविधान सबको समान अधिकार प्रदान करता है तथा सबके दायित्व एक समान है।


यह भी पढ़ें : मीट माफिया याकूब कुरैशी की बढ़ी मुश्किल, डेनमार्क कार्टूनिस्ट पर 51 करोड़ का इनाम घोषणा मामले में चलेगा मुकदमा

आजाद हिन्दुस्तान का इतिहास साक्षी है कि श की सुरक्षा, अखण्डता तथा इसके गौरव और प्रतिष्ठा के लिए सभी ने, चाहे वे हिन्दू हो या मुसलमान अथवा किसी अन्य धर्म के अनुयायी हो सभी ने बढ़-चढ़कर बलिदान दिया है। मौलाना फजलूद्दीन ने कहा कि "गजवा-ए-हिन्द' के नाम पर युद्ध की आग भड़काने वाले क्या हिन्दुस्तान के मुसलमानों से युद्ध करेंगे? यदि संख्या के आधार पर देखा जाए तो भारत में पाकिस्तान से अधिक मुसलमान रहते हैं। क्या गजवा-ए-हिन्द की बात करने वालों की नजर में जंग करना गजवा-ए-हिन्द होगा?