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बीज की जांच के नियमों में विसंगति

किसानों को भुगतना पड़ता है खामियाजा बीजों की जांच रिपोर्ट आने में लगता है एक महिना से अधिक समय , तब तक किसान कर देता है बोवनी

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हरदा

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Brajesh Sharma

Jun 04, 2018

बीज की जांच के नियमों में विसंगति

बीज की जांच के नियमों में विसंगति

खिरकिया. मानसून के पूर्व ही किसानों द्वारा खरीफ की बोवनी की तैयारियां की जा रही है। खेतों को बोवनी योग्य बनाने से लेकर खाद बीज की खरीदी की जा रही है। लेकिन बीजों की मानकता को लेकर हर साल सवाल खड़े होते है। अमानक एवं खराब बीजों के चलते बोबनी के बाद कई किसानों के खेतों में बीजों का अंकुरण नहीं होता है। ऐसे में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बीजों की जांच करने का अधिकार कृषि विभाग के पास है। लेकिन नियमों की जटिलता एवं समय सीमा के चलते जांच के पूर्व ही किसानों को बीज खरीदकर बोवनी करनी पड़ती है। ऐसे में अब किसानों द्वारा बीजों की जांच शीघ्रता से करने की मांग की जा रही है। बीज सहित रासायनिक पदार्थो का विक्रय करने वाली लायसेंसधारी दुकानों से जांच के लिए सैंपल लिए जाते है, लेकिन इन सैंपलों की जांच में लंबा समय लग जाता है, जब तक किसान अपनी बोवनी कर चुका होता है। ऐसे में बाद में बीज अमानक निकलते पर किसानों को आर्थिक नुकसान होता है।
जांच में लगा दिए जाते है 30 से 35 दिन -
कृषि विभाग द्वारा खरीफ के सीजन के पूर्व अभियान चलाकर लायसेंसधारी फर्मो द्वारा विक्रय किए जाने वाले बीजों के सैंपल लिए जाते है, जिनकी मानकता जांचने के लिए उन्हें प्रयोगशाला भेजा जाता हैं, लेकिन इसकी जांच रिपोर्ट आने में 30 से 35 दिन का समय लग जाता है। यदि विभाग द्वारा 1 जून को सैंपल जांच के लिए भेजे जाते है, तो उसकी रिपोर्ट 30 जून के बाद ही मिलेगी, जबकि इस बीच किसान व्यापारियों से बीज खरीदकर बोवनी भी कर चुके होते है। इतना लंबा समय लगने में यदि किसान जांच रिपोर्ट का इंतजार करते तो उनका बोवनी का समय बीत जाता है।
किसानों को होता है आर्थिक नुकसान-
बीजों की मारामारी के चलते किसान मानसून आने के पूर्व ही व्यापारियों से खरीद लेता है। बारिश होने के बाद बोवनी भी कर चुका होता है। बाद में यदि बीज अमानक पाया जाता या फिर खेतों में अंकुरण नहीं होता है तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ब्लाक में आधा सैकड़ा से अधिक खाद बीज की दुकानें है। विभाग द्वारा सोयाबीन, मूंग, उड़द का सैंपल दुकानों से लिया जाता है, व्यापारियों द्वारा भी बीज उपलब्ध करा दिया जाता है, लेकिन जांच में लेतलतीफी होने के चलते किसानों एवं व्यापारियों दोनों को बीजों की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं होती है। ऐसे में व्यापारियों द्वारा विक्रय करना एवं किसानों द्वारा क्रय करना मजबूरी होती है। यदि समय रहते बीज की जांच रिपोर्ट मिल जाती है तो व्यापारी इन बीजों को बेचने से बच सकता है, वहीं किसान भी इसे नहीं खरीदेंगे।
एक सप्ताह में जांच की कार्यवाही हो पूरी-
किसानों का कहना है कि जांच के नाम पर एक माह का समय काफी अधिक होता है। ऐसे में रिपोर्ट आने के बाद जांच का कोई औचित्य नहीं रहता है, जबकि इसकी कार्यवाही कम से कम 3 से 4 दिन व अधिकतम एक सप्ताह में पूरी हो जानी चाहिए, ताकि किसानों को समय रहते बीजों की मानकता का पता चल सके। इसके जांच के नियमों के संशोधन की आवश्यकता है। जांच में बीज अमानक पाया जाए तो सर्टिफाइड करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके लिए किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। जिस संस्था का बीज आमनक हो, उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

इनका कहना है-
शासन के नियमों के तहत जांच की जाती है। सैंपल पहुंचने के 30 दिन बाद रिपोर्ट दी जाती है। शासन के निमयों का पालन किया जाता है।
कपिल बैड़ा, संयुक्त संचालक, कृषि विभाग हरदा