
Colors of Gangaur of Bhuana scattered in National Culture Festival of Pune
मिशा ने बताया कि यह उत्सव राज्यपाल के विशेष आतिथ्य में 22 से 24 सितंबर के बीच लोक कला और संस्कृति पर आधारित यह कार्यक्रम पूणे महानगरपालिका के लोकशाहीर अन्नाभाऊ साठे स्मारक सभागार में हुआ। इसमें देश के िविभिन्न राज्यों से आए 200 से भी अधिक कलाकारों ने अपनी कला और संस्कृति का रंग बिखेरा। महोत्सव में गणगौर,गुसाड़ी, कच्ची घोड़ी,सिडीधमाल, कालबेलिया, मांगणियार,कोली,लंबाड़ी,धनगरीगजा ,सौंगी मुखवटे,ढोलकुनिथा,डांगी,पंथी आदि लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी गई।
गणगौर नृत्य के पारंपरिक वेशभूषा,वाद्य और गीतों पर हरदा जिले के ग्राम छीपानेर की बेटियों ने शानदार नृत्य किया। गणगौर लोकनृत्य पूरे निमाड़ और भुआणा अंचल में धूमधाम से मनाया जाता है। भुआणा अंचल में गीत संगीत नृत्य का विशेष महत्व होता है।मां गणगौर के रथ और नृत्य साज सज्जा के साथ जब दल ने प्रस्तुति दी तो सभागार तालियों की गूंज उठा। शर्मा बताती हैं कि वे इस विधा और अपनी कला व संस्कृति में रुचि रखने वाली उभरती प्रतिभाओं को भी इसकी बारीकियां सिखा रही हैं। जिससे वे हमारी संस्कृति कला और धरोहर को आधुनिकता की चकाचौंध में गुम होने से बचा सकें। उन्होंने बताया कि वे अपने साथ प्रस्तुति के दौरान वैष्णवी लाहोरे,सर्वेष्ठा राजपूत हारमोनियम पर संगत करने वाले गायक सुमित शर्मा ढोलक के साथी मयंक मालवीय और विनोद गौर को भी साथ ले जाती हैं,जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़े और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।
Published on:
25 Sept 2023 09:00 pm
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