
Temple
टिमरनी. अद्र्धनारेश्वरी नव चण्डिका मंदिर में शुक्रवार को नाग पंचमी पर भक्तों की भीड़ लगी रही। त्योहारों पर इस स्थान पर काफी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। पूरे जिले से श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। शुक्रवार को नाग पंचमी का त्यौहार होने के मद्देनजर यहां जिले भर के श्रद्धालु सुबह से शाम तक नाग देवता को दूध पिलाने व भगवान भोले को प्रसन्न करने हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
ये है मंदिर से जुड़ी जानकारी :
21 वर्ष पहले संत प्रभादेवी ने एक खेत खरीदा था। वह खेत पर गेहूं फसल कटवाने आई हुई थी। सड़क किनारे लगे नीम के पेड़ के नीचे वह खड़ी होकर अपने खेत को निहार रही थी तभी उन्होंने देखा कि खेत में एक स्थान पर गेहूं की बालियां बगैर हवा के ही हिल रही है, जिसे देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ और आसपास के खेत वालों को आवाज देकर बुलाया। उन्होंने भी वही नजारा देखा जो संत प्रभादेवी ने देखा था। लोगों ने देखा तो तत्काल संत प्रभादेवी को उनके शरीर में एक शक्ति आने का आभास हुआ और उस शक्ति ने उनसे कहा कि यहां मेरा स्थान बनाओ। सभी लोगों ने जिस स्थान पर खेत में गेहूं की बालियां हिल रही थी वहां जाकर देखा तो कुछ नजर नहीं आया फिर उन्होंने उस स्थान पर थोड़ी सी खुदाई की तो वहां पर भगवान भोलेनाथ की मूर्ति के साथ त्रिशूल भी निकला। संत प्रभादेवी को शक्ति शरीर में आई हुई थी। उन्होंने यहां का नाम मल्लिकार्जुन रखने का कहा और कहा कि मैं इसी से प्रकट हुई हूं। यहां मेरा मंदिर बनवाईये। इसके बाद 1 वर्ष दो माह में यहां मंदिर बनकर तैयार किया गया। संत प्रभादेवी ने ब्रह्मकांड किया है, जो कि उन्होंने मां नर्मदा मैया के समक्ष 35 वर्ष पहले संकल्प लिया था कि मैं ब्र?हचर्य का पालन करुंगी, जो आज सतत अपने संकल्प को निभा रही हैं।
Published on:
28 Jul 2017 09:01 pm
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