
भोपाल। मध्यप्रदेश के अन्नदाता इन दिनों परेशान हो रहे हैं। कई जिलों में बोवनी कर चुके किसान अब खाद का इंतजार कर रहे हैं। सीएम के गृह जिले से लेकर कृषि मंत्री के गृह जिले में भी यही हाल है। कांग्रेस भी इस समस्या को उठा चुकी है, वहीं गुरुवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान भी इस संकट से निपटने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं। लेकिन समस्या बढ़ती नजर आ रही है। शुक्रवार को भी हरदा जिले में 500 मीटर लंबी कतार देखी गईं।
ताजा मामला हरदा जिले का है। शुक्रवार को भी हरदा जिले में समितियों के बाहर लंबी-लंबी कतार लगी हुई है। किसान खाद का इंतजार कर रहे हैं। जिले के ही मसनगांव, खिरकिया, टिमरनी आदि स्थानों पर भी समितियों में खाद की मारामारी है। किसान आधी रात से ही खाद के लिए अपने नंबर लगाने पहुंच रहे हैं।
हरदा जिले के किसानों के मुताबिक वे कई दिनों से परेशान हैं। उन्होंने इस बारिश में बोवनी तो कर दी है, लेकिन समितियों में अब तक व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि हम सुबह चार बजे से खाद के लिए लाइन लगा रहे हैं, लेकिन दोपहर तक नंबर नहीं आया है। यहां 500 मीटर लंबी-लंबी कतार लगी हुई है।
मसनगांव के किसान बोले- फसल चौपट हो जाएगी
हरदा जिले के ही मसनगांव के किसानों का कहना है कि उन्होंने चने की फसल की बोवनी 15 अक्टूबर के आसपास हो जाती है, लेकिन इस साल मानसून देर तक रहने से रबी फसल की बोवनी देरी से हो रही है। सभी किसान 15 नवंबर तक बोवनी करने की जुगत में है। कई किसान सूखे में बोवनी करने के बाद खेतों में पानी लगा रहे हैं। इस वर्ष खेतों में गेहूं, चना के साथ ही सरसों की भी बोवनी होगी। पिछले साल सरसों का भाव अच्छा होने और बेहतर पैदावार होने से कई किसान सरसों की फसल को प्राथमिकता दे रहे हैं। जिन किसानों के पास पानी के साधन है, वे चने की फसल को प्राथमिकता दे रहे हैं। ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के लिए चने की कटाई जल्दी हो जाती है। जिससे मूंग की बोवनी समय पर हो जाती है। नहर से सिंचित खेतों के किसान नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। नहर में पानी आने के बाद ही किसान खेतों में पलेवा शुरू करेंगे।
समितियों के पास नहीं मिल रही खाद
क्षेत्र की समितियों के पास डीएपी और यूरिया खाद नगद में भी नहीं मिल रहा है। गांव की समिति में भी किसानों को खाद लेने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। समिति की ओर से प्रति वर्ष किसानों को उधारी में खाद दिया जाता है। जिसका ब्याज प्रदेश सरकार की ओर वहन किया जाता है। लेकिन इस वर्ष समिति से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर खाद नहीं मिल रहा है। उन्हें नगद की व्यवस्था कर खाद खरीदना पड़ रहा है। समिति में खाता खुलवाने के समय किसानों से शेयर के रूप में राशि जमा कराई जाती है। जिसका उपयोग सरकार करती है। उस पर कोई ब्याज नहीं मिलता है। केवल खाद बीज लेने के लिए किसानों की ओर से शेयर की राशि जमा की जाती है। किसानों के डिफाल्टर होने पर 13 से 17 प्रतिशत ब्याज समिति में जमा करना होता है। इस वर्ष कई किसान डिफाल्टर हो गए थे। इसके बाद उन्हें ब्याज सहित रकम चुकता करना पड़ा। इसके बावजूद भी उन्हें उधारी में खाद बीज नहीं मिला है।
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सीएम ने दिए निर्देश
इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएम हाउस में अफसरों की बैठक ली। जिसमें पीएस, कमिश्रन और एमडी को खाद की समस्या दूर करने की सख्त हिदायत दी।
Updated on:
04 Nov 2022 04:01 pm
Published on:
04 Nov 2022 04:00 pm

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