
(Harda District Hospital) जिला अस्पताल के लैब में रखी मशीनें हो रही बीमार
हरदा. सरकार ने जिला अस्पताल में प्राइवेट लैबों में होने वाली जांच सुविधा के लिए करोड़ों रुपए की मशीन दी है, लेकिन स्टॉफ नहीं होने के कारण रोजाना मरीजों की अपने रोगों से संबंधित जांच करवाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन प्रयोगशाला और सेंट्रल लैब में टेक्नीशियन सहित सपोर्ट स्टॉफ की व्यवस्था नहीं करवा रहा है। समय पर जांच नहीं होने के कारण रोगियों को प्राइवेट लैबों का मुंह देखना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के लिए दो दिनों तक परेशान हो रहे हैं मरीज
जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल की प्रयोगशाला में जहां स्टॉफ की कमी है, वहीं आधुनिक सेंट्रल लैब भी टेक्नीशियन व सपोर्ट स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है। वर्तमान में प्रयोगशाला में दो टेक्नीशियन हैं। जबकि 5 आवश्यकता है। सपोर्ट स्टॉफ 3 की जगह एक ही है। इसी तरह सेंट्रल लैब में 6 आधुनिक मशीन हैं। इसे हिसाब से 4 टेक्नीशियन होना चाहिए, किंतु एक ही टेक्नीशियन से काम चलाया जा रहा है। यहां पर टेक्नीशियन मशीनों में जांच के लिए सैंपल लगाने के साथ ही कम्प्यूटर में रिपोर्ट भी तैयार करता है।एक कर्मचारी के भरोसे दो काम होने से रोगियों की जांच समय पर नहीं हो रही है, वहीं रिपोर्ट के लिए भी उन्हें दो-दो दिनों तक परेशान होना पड़ रहा है।
जांच करवाने आ रहे है रोजाना 125 मरीज
वर्तमान में प्रयोगशाला में प्रतिदिन लगभग 125 मरीज विभिन्न रोगों की जांच करवाने के लिए आ रहे हैं। सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे तक मरीजों की कतार लगी रहती है। प्रयोगशाला में एक टेक्नीशियन मरीजों के सैंपल लेने के साथ ही उनकी जानकारी कम्प्यूटर में फीड करता है। इसके बाद इन सैंपलों को एकत्रित करके सेंट्रल लैब में जांच के लिए देकर आता है। किंतु वहां भी एक ही टेक्नीशियन होने से वह समय पर मशीनों में टेस्ट नहीं लगा पा रहा है। इसकी वजह से रोगियों को जांच रिपोर्ट के लिए लैब के बाहर इंतजार करना पड़ता है या अगले दिन आकर रिपोर्ट लेना पड़ रही है।
101 जांच की सुविधा, लेकिन पूरी नहीं हो रही
शासन द्वारा प्राइवेट लैबों में होने वाली जांच की सुविधा जिला अस्पताल की सेंट्रल लैब में शुरू की गई है। यहां पर 6 आधुनिक मशीन हैं। लगभग 2 करोड़ की लागत से लैब को स्थापित किया गया है। इन मशीनों से 101 प्रकार की जांचे होती हैं। जिसमें हार्मोंंस टेस्ट, थॉयराइड, विटामिन डी, एचबी 1 सी, शुगर, पीटी, एपीटीटी, डी-डायमर, एलडीएच, थैरेटिन, सीआरपी, एएसओ, आरए फेक्टर, कैल्शियम, यूरीएसिड, किडऩी प्रोफाइल, लीवर प्रोफाइल, यूरीन टेस्ट सहित अन्य जांचों की सुविधा है, लेकिन टेक्नीशियनों के कारण जांचे भी नहीं हो पा रही हैं। इसके कारण मरीजों को प्राइवेट लैबों का मुंह देखना पड़ रहा है। जब जिला अस्पताल के ये हाल हैं तो तहसीलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोगियों को क्या स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही होंगी।
इनका कहना है
प्राइवेट कंपनी को सेंट्रल लैब संचालन का ठेका दिया गया है।उन्हें टेक्नीशियन की व्यवस्था करना चाहिए। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में यदि कोई टेक्नीशियन होगा तो उसे लैब में अटैच कर देंगे। एक टेक्नीशियन मशीनों को संभाल सकता है, क्योंकि मशीन आधुनिक है।
Dr. Sudhir Jaisani - डॉ. सुधीर जैसानी , सीएमएचओ, जिला अस्पताल, हरदा
Published on:
26 Mar 2022 12:37 am
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