
Highest registry fee in Khirkiya district
खिरकिया. कमलनाथ सरकार द्वारा भूमि की रजिस्ट्रियों में स्टांप ड्यूटी घटाकर भले ही प्रदेश में नए नियम लागू कर दिए गए हो, लेकिन नगर आज भी रजिस्ट्री शुल्क को लेकर बड़ी विसंगतियों से जूझ रहा है। नगर में आवासीय प्लॉट तो छोड़ों कृषि भूमि के रजिस्ट्री रेट इतने अधिक हंै कि सस्ती दरों पर भूमि बेचने पर भी लोग खरीदने से हिचकिचाते हैं। लंबे समय से भूमि की रजिस्ट्री दर कम किए जाने की मांग उठ रही है, लेकिन निराकरण नहीं हो रहा है। ऐसे में प्रभारी मंत्री के नगर पहुंचने पर एक बार फिर यह मांग उठी है। नागरिकों ने रजिस्ट्री की दर जिले में सबसे अधिक होने पर इसे नगर के विकास में बाधक भी बताया है। जानकारी के अनुसार नगरीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कृषि भूमि खरीदने बेचने में लगने वाला रजिस्ट्री शुल्क जिले की अन्य तहसीलों से अधिक होने के कारण नागरिक न तो जमीन खरीद पा रहे है, और ना ही अपनी जमीन बेच पा रहे हैं। चूंकि जिले में सभी तहसीलों में रजिस्ट्री की गाइडलाइन समान होनी चाहिए, लेकिन खिरकिया में काफी अधिक है। ऐसे में जितनी जमीन या प्लॉट की कीमत नहीं होती है, उससे अधिक रजिस्ट्री शुल्क चुकाना पड़ता है।
शासकीय मूल्य 20 लाख, बाजार कीमत 5 से 10 लाख
नगरीय क्षेत्र में लगी कृषि भूमि की कीमत शासन की गाइ डलाइन के हिसाब से 56 लाख रुपए हेक्टेयर है, जिसमें प्रति एकड़ कीमत करीब 20 लाख से अधिक है। जबकि भूमि का विक्रय करने पर उसकी बाजार कीमत 5 से 10 रुपए होती है। ऐसे में जब जमीन क्रय की जाती है, तो उस भूमि पर शासन की गाइडलाइन के अनुसार 56 लाख रुपए हेक्टेयर के अनुसार स्टांप ड्यूटी व रजिस्ट्री शुल्क लगता है। इसमें भी कृषि भूमि की पहली 3 हजार फीट के क्षेत्र की राशि स्क्वेयर फीट में गणना करके ली जाती है, जबकि शेष जमीन पर हेक्टेयर की दर से रजिस्ट्री होती है। ऐसे में जितने में भूमि नहीं क्रय की जाती है, उससे अधिक उसका रजिस्ट्री शुल्क चुकाना पड़ता है। वर्तमान में यदि 1 एकड़ की रजिस्ट्री कराते हैं, तो उसके लिए करीब 4 लाख रुपए देने होते हैं, जो बहुत अधिक है। नगरीय क्षेत्र में आवासीय प्लॉट की बात करें तो 6 00 रुपए वर्ग फीट से रजिस्ट्री का शुल्क देना पड़ रहा है। यदि किसी ने 200 रुपए वर्ग फीट से प्लॉट खरीदा हो तो, उसे तीन गुना अधिक राशि देकर उसकी रजिस्ट्री करानी होगी, जो बहुत बड़ी विसंगति है।
रजिस्ट्री के भाव सुनकर सौदे हो जाते हंै निरस्त
नगर सहित आसपास क्षेत्र में कई कृषि भूमि विक्रय करने के लिए किसान इच्छुक है, वहीं खरीद्दार भी भूमि खरीदने के लिए उत्साह दिखाते हैं, लेकिन रजिस्ट्री के भाव सुनकर ही सौदे निरस्त हो जाते हंै। ऐसे में नगरीय क्षेत्र में न तो कृषि भूमि का खरीदी बिक्री हो पा रही है, और ना ही आवासीय प्लॉटो को लेने के लिए लोग रूचि दिखा रहे है। ऐसे में इस विसंगति को दूर करने के लिए गाइडलाइन में परिवर्तन किया जाना आवश्यक हो गया है। भूमि दरों के बारें में जानकारी रखने वालों ने बताया कि जिले में कही इतना अधिक रेट नहीं है, जितना खिरकिया शहर में है। कृषि भूमि की कीमत शासन की गाइडलाइन के हिसाब से 10 से 12 लाख होना चाहिए, जिससे कि स्टांप ड्यूटी भी कम लगें एवं रजिस्ट्री शुल्क में भी कमी आए।
प्रभारी मंत्री को कराया अवगत, कलेक्टर को किया निर्देशित
सोमवार को नगर पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री पीसी शर्मा को नागरिकों ने इस समस्या से अवगत कराया। नगर परिषद अध्यक्ष यशोदा दुर्गादास पाटिल सहित शहरवासियों ने प्रभारी मंत्री से रजिस्ट्री शुल्क को कम करने की मांग की है। साथ ही अवगत कराया कि जिले सहित प्रदेश के अन्य बड़ें शहरों रजिस्ट्री का इतना शुल्क नहीं है, जितना खिरकिया शहर में है, जो एक बड़ी विसंगति है। ऐसे में भूमि की खरीदी बिक्री नहीं होने से शहर का विकास भी रुका हुआ है। उन्होंने इस समस्या का निराकरण किए जाने की मांग की है। जिस पर प्रभारी मंत्री ने कलेक्टर एस. विश्वनाथन को मामले को देखने की बात कही है।
इनका कहना
शहर में रजिस्ट्री शुल्क अधिक होने की समस्या से नागरिकों ने अवगत कराया है। इस संबंध में कलेक्टर को निराकरण के लिए निर्देशित किया है। यदि कलेक्टर स्तर से समस्या का निराकरण नहीं होता है, तो मामले को भोपाल भेजने की बात कही है। शासन स्तर से समस्या का निराकरण कराया जाएगा।
पीसी शर्मा, प्रभारी मंत्री, हरदा
Published on:
28 Aug 2019 06:00 am
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