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पहले परिवार की जिम्मेदारी फिर खेत पर भी काम करने पहुंचती हैं ग्रामीण महिलाएं

अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस

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हरदा

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Pradeep Sahu

Oct 15, 2018

International day of Rural Women 2018

पहले परिवार की जिम्मेदारी फिर खेत पर भी काम करने पहुंचती हैं ग्रामीण महिलाएं

बालागांव. ग्रामीण जीवन, यानि भौतिक सुख-सुविधाओं की समाए जिंदगी। इस परिवेश में यहां की महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वे घरेलू कामकाज के साथ ही खेती-किसानी के काम में भी पूरा सहयोग करती हैं। बालागांव की समोताबाई पति बृजलाल उर्फ बिरजू ओनकर ऐसी ही सैकड़ों महिलाओं में से एक है। गरीबी के बीच जीवन जी रहे इस परिवार की कुशल गृहिणी अपने पति की दो एकड़ भूमि में काम करती हैं। दो बेटे, पति और वृद्ध सास के साथ रहते हुए घरेलू कामकाज संभालने के बाद बचा समय खेत के कामों में लगाती हैं। जन्म से नेत्रहीन बेटे धनराज को संभालना भी उनकी चुनौती को बढ़ाता है। इस परिवार को सरकारी मदद भी नहीं मिलती। दो साल पहले ग्राम पंचायत ने शौचालय निर्माण के लिए 200 ईंट, दो फर्सी एवं सीट तो दी, लेकिन रेत व सीमेंट नहीं दी। इससे निर्माण अधूरा है। नि:शक्तजन शिविर में बेटे की जांच कराई, लेकिन प्रमाण पत्र आज तक नहीं मिला। मुख्यमंत्री संबल योजना का कार्ड भी नहीं बना। परिवार को ग्राम पंचायत से किसी भी प्रकार कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। इन सबके बीच समोताबाई अभावग्रस्त माहौल में दृढ़ता के साथ जीवनयापन कर रही हैं। पति को खेती में हाथ बंटा रही हैं, घर का खाना बना रही हैं और अपने बच्चों का पालन पोषण भी कर रही हंै।