
Jal Jeevan Mission Dhindhora, tribal villagers like clean water
--गर्मी के तेवर अभी पूरी तरह से तीखे हुए ही नहीं हैं,इससे पहले ही दूरस्थ वनांचलों के आदिवासी बहुल गांव बांसपानी में पीने के पानी का संकट गहराने लगा है। गांव का हैंडपंप भू-जल स्तर में गिरावट आने से बंद हो गया है। एक हैंडपंप करीब 800 मीटर दूर स्कूल के पास लगा है। वह भी चलते चलते कभी भी बंद हो जाता है। फिर काफी देर बार चालू होता है। गांव की सुमन बाई,कोकिला बाई बताती हैं कि पानी की भी रोज चिंता ही रहती है। बिना पानी कोई काम ही नहीं होता। सुबह उठते ही से ही मजदूरी की चिंता से पहले पानी के इंतजाम के लिए करीब एक किमी दूर नदी पर जाना पड़ता है।
गांव से करीब एक किमी दूर नाले नुमा नदी की झीर है। यहां पानी जमा हुआ है। बहाव नहीं होने और जमीन में पानी नहीं होने से यह भी मटमैला हो गया है। गांव के लोग पशुओं के लिए यहीं से पानी भरकर ले जाते हैं। बाजू में नदी के बहाव वाले पथरीले रास्ते के पानी को महिलाएं भरकर तेज धूप में भी दिन में कई बार समूह में तो कई अकेले सिर पर बर्तन लिए आते जाते आसानी से देखी जा सकती हैं। सूखा इलाका होने से गर्मी में यह बेहद तपता है। कई लोग गरीबी के कारण यहां तक नंगे पैर भी आते हैं। जिससे परेशानी दोगुनी हो जाती है। पीएचई के अधिकारियों से संपर्क किया,मोबाइल अनरिचेबल होने से बात नहीं हो सकी।
ग्रामीण बोले..
गांव से करीब एक किमी दूर नदी है। जहां से पानी लाते हैं। गांव में हैंडपंप बंद हैं। ऐसे में महिलाओं को कभी कभी दिन में 3-4 चार बार भी पानी लेने नदी जाना पड़ता है। गर्मी में यह समस्या और बढ़ेगी। सरपंच को बता चुके हैं। अधिकारी नेता कोई हमारी सुध नहीं लेते हैं।
-सुखराम,बांसपानी
गांव में पानी की व्यवस्था नहीं है। हमारे गांव में करीब एक हजार लोग रहते हैं। हम सभी रोज करीब एक से डेढ़ किमी दूर नदी से पानी लाते हैं। गर्मी में हर साल हैंडपंप सूख जाते हैं। दूसरे साधन नहीं हैं। एक बार में ज्यादा पानी ला सकें,इसलिए बच्चों को भी साथ ले जाते हैं।
-सुखिया बाई,गृहिणी
इनका कहना है
इस संबंध में पीएचई के अधिकारियों और ग्राम पंचायत के सचिव से वहां की पेयजल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जानकारी लेकर आगे कार्रवाई करेंग। यदि हैंडपंप में पाइप बढ़ाने या मोटर लगाने की जरूरत है तो यह व्यवस्था कराने के भी बैठक में कलेक्टर ने पीएचई को बैठक में निर्देश दिए हैं।जिससे ग्रामीणों को परेशान न होना पड़े।
-रोहित सिसोनिया,सीईओ,जिपं हरदा
1 हरदा। झीर के पास से पानी भरते हुए महिलाएं।
Published on:
12 Mar 2023 08:19 pm
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