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खुद कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन 70 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा

अनपढ़ महिलाओं ने 4 माह में 8 लाख रुपए कमाए थे। इनका नेतृत्व किया सरस्वती कोरकू ने। जो खुद कभी स्कूल भी नहीं गई।

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खुद कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन 70 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा

खुद कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन 70 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा

हरदा. कहते हैं प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, ऐसा ही कुछ कर दिखाया मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव की महिला ने, जो खुद कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन स्कूल डे्रस बनाने का काम हाथ में लेकर खुद तो आत्मनिर्भर बनी ही सही, साथ ही अन्य 70 महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए रास्ता दिखा कर उनकी मास्टर ट्रेनर बन गई है।

कोरोना संक्रमण के दौरान लगे लॉकडाउन में जहां हजारों लोगों का रोजगार छिना और नौकरियां छूटी वहीं वनांचल की अनपढ़ महिलाओं ने 4 माह में 8 लाख रुपए कमाए थे। इनका नेतृत्व किया सरस्वती कोरकू ने। जो खुद कभी स्कूल भी नहीं गई। सरस्वती बताती हैं राजाबरारी की अनपढ़ महिलाओं का 2018 में समूह बनाया था। लेकिन वह खुद पढ़ी लिखी नहीं थी, इस कारण कागजी कार्रवाई के लिए कुछ शिक्षित महिलाओं को अध्यक्ष और सचिव बनाया। कठोर मेहनत के दम पर वह समूह की रोल मॉडल बन चुकी हैं। वे अब मास्टर ट्रेनर भी हैं। उन्होंने 70 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने राह दिखाकर प्रेरित किया।

कोरोना के दौरान समूह को जिले के 72 स्कूलों के लिए 9500 स्कूली ड्रेस सिलाई का काम मिला। जिसे उन्होंने 4 माह में पूरा किया। इससे समूह को तो 7.79 लाख मिले। इसमें सबसे ज्यादा 63 हजार रुपए सरस्वती के हिस्से में आए। इसके बाद सरस्वती ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ ही समय बाद राजाबरारी की 9 स्कूलों की ड्रेस सिलीं। इसके अलावा खुद का सिलाई का काम शुरू किया जो अब लगातार जारी है। स्कूल में मध्याह्न भोजन का काम शुरू किया। इस काम से सरस्वती सालाना सवा लाख रुपए कमा रही हैं।

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अब बच्चों का भविष्य संवार रहीं

सरस्वती ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। खुद के ना पढ़ पाने की टीस उनके मन में रही इसलिए उन्होंने बच्चों को शिक्षित करने की ठानी। दो बेटों में से बड़ा बेटा अब आगरा में बीटेक कर रहा है तो छोटा बेटा नवोदय में पढ़ता है।