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खासियत- इन मटकों का पानी पीने से बढ़ती है तंदुरुस्ती

मटकों का पानी पीने से बढ़ती है तंदुरुस्ती

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refrigerator of india - deshi matka

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हंडिया
देशी फ्रिज मटका इस बार गरीबों की पहुंच से दूर होता दिखाई पड़ रहा है। गर्मी जैसे-जैसे बढ़ती जा रही है वैसे ही मटके की मंाग भी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि हंडिया हाट बाजार में बिकने आये मटके की दुकान पर सन्नाटा पसरा दिखाई पड़ा । इस साल मटके की कीमत गत वर्ष से दोगुनी हो गई है। ग्रामीण महेश कुमार कहते हैं कि मटके के दाम में आई तेजी से इसे खरीद पाना कठिन हो रहा है।

मटके का पानी स्वास्थ के लिए लाभदायक इसलिए बढ़ रही है मांग

आमतौर पर इन दिनों मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। ऐसे में फ्रिज का पानी कई प्रकार की बीमारी का सबब वन सकता है जिसके चलते आम जनता के लिए मटका खरीदना मजबूरी ही दिखाई पड़ रही है। मटका का पानी नुकसान नहीं करता है बल्कि यह सेहतमंद होता है इसलिए लोग मटका खरीदते ही हैं।

पिछले साल की अपेक्षा मटकों की कीमत 10 से 20 फीसदी तक बढ़ी फिर भी कम नहीं हुई बिक्री
इधर टिमरनी में मिट्टी के घड़ों पर महंगाई की मार होने के बावजूद इनकी बिक्री में कमी नहीं आई है। बाजार में पिछले साल की अपेक्षा मटकों की कीमत 10 से 20 फीसदी तक बढ़ी है, इसके बावजूद इन्हें खरीददारों का कोई टोटा नहीं है। मिट्टी के बर्तनों से जुड़े कारोबारी शहर में ज्यादा नहीं है। इसके चलते सप्लाई भी पूरी नहीं हो पा रही है। शहर के कुछ गिने-चुने स्थानों पर ही मटके मिल रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि मटके के भाव पिछले साल से ज्यादा हैं, लेकिन दामों में उछाल आ गया है। इतना ही नहीं इनके साइज में हर साल कमी देखी जा रही है। पहले 100 रुपए में मिलने वाला मटका ज्यादातर बड़ी दुकानों या फिर संस्थानों के लिए खरीदा जाता था। अब 60 से 90 रुपए में घर के उपयोग लिए ही घड़ा मिल रहा है। महंगाई के बावजूद इनके खरीददार मुंह नहीं मोड़ रहे हैं। वजह है गर्मी के मौसम में मटके में भरने वाला पानी स्वादिष्ट हो जाता है, जिसे पानी लाभकारी है। इसी तरह मिट्टी के तवे भी महंगे हो गए हैं।