
खेतों में लहलहा रही सोयाबीन फसल के हरे भरे पौधे अचानक लगे सूखने
मसनगांव/बालागांव. खरीफ सीजन की मुख्य फसल सोयाबीन पर संकट गहराने लगा है। जेएस 9305 में अफलन की स्थिति बनने के बाद अब दूसरी प्रजाति के सोयाबीन के पौधे भी अचानक हरे भरे ही सूखने लगे हैं। इससे इस वर्ष फिर किसानों को सोयाबीन की फसल से निराशा हाथ लगने की आशंका दिखाई देने लगी है। पहले से ही कम बारिश के कारण हताश बैठे किसानों को सोयाबीन में लगने वाली बीमारियों ने निराश कर दिया। अफलन और पौधों के सूखने से बेहतर पैदावार होने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इस वर्ष जिले में किसानों ने कई प्रजातियों की सोयाबीन की बोवनी की है। इनमें से जेएस 9305 में अफलन की स्थिति बनी हुई है। जे एस 9560 एवं 1050 जैसी प्रजातियों में अचानक पौधे सूखने लगे है।
बारिश के बाद सूखने लगे ९५६० प्रजाति के पौधे-
गांव के किसान रामनिवास पटेल ने बताया कि उन्होंने अपने 10 एकड़ खेत में 9560 प्रजाति की सोयाबीन की बोवनी की है। जो बारिश होने के पहले तक अच्छी लहलहा रही थी। लेकिन अब अचानक जगह-जगह सोयाबीन के पौधे सूखने लगे है। पौधों में लगी फलियां जमीन पर गिरने लगी है। पौधों के पत्ते खराब होकर गिरने लगे है। यही स्थिती रही तो पूरे खेत में लगी फसल खराब हो सकती है। जिन किसानों ने 9305 प्रजाति की बोवनी की है उन्होंने तो उत्पादन की आस ही छोड़ दी है। ग्राम के कृषक बालाराम मालवीय, रामदास पाटिल, ओम भायरे, रामकृष्ण पाटिल, राकेश रायखेरे अशोक राठौर, अमरदास नायरे, शिवनारायण खरे, भागीरथ पटेल, गणेश मुकाती आदि ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने अपने खेतों में जयेश 9305 प्रजाति की सोयाबीन लगाई थी। इसमें बारिश के पहले फूल झूम रहे थे। लेकिन इसके बाद फूलों से फली नहीं बनने से पौधे बांझ खड़े हुए हैं। फल नहीं आने के कारण फसल खराब होने लगी है।
खेतों में जगह-जगह बने पीले-पीले टांके-
अफलन के साथ ही पौधों को सूखने की शिकायत भी किसान कर रहे हैं। खेतों मे कई जगहों पर पीले-पीले टांके बन गये है। जो कौन किस बीमारी के हो रहे इसका पता भी किसानों को नहीं चल पा रहा है। किसानों का कहना है कि पहले से ही महंगी दवाओं का स्प्रे करने से हजारों रुपए की दवा खेतों में डाल दी है। इसके बावजूद अब नई-नई बीमारियां लगने से किसानो की आर्थिक स्थिति गड़बड़ाने लगी है।
सफेद मख्खी से बढ़ रही बीमारियां-
सोयाबीन के पौधों में अफलन और सूखने का कारण सफेद मख्खी को माना जा रहा है। कीटनाशक कंपनी के अधिकारी रामनारायण पटेल ने बताया कि सोयाबीन की फसल में प्रतिवर्ष सफेद मख्खी का प्रकोप बना रहता है। गर्मी के कारण अधिक मात्रा में अटैक होता है। इससे पौधे सूखने के साथ ही अफलन की स्थिति बन जाती है। इस वर्ष कम बारिश के कारण तेज गर्मी पडऩे से यह स्थिति बनी है। किसानो को अपने खेतों मे बीटासायफ्लुथ्रिऩ इमिडाक्लोपिड का छिड़काव करना चाहिए। इससे जो पौधे संक्रमित नहीं है उनमें फल आ सकते है। पौधे इस बीमारी से सुरक्षित भी रहेंगे।
पिछले साल का अभी तक नहीं मिला फसल बीमा-
प्रतिवर्ष अपनी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए किसानों द्वारा बैंकों के माध्यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया जाता है। लेकिन उसका लाभ किसानों को समय पर नहीं मिलता है। पिछले वर्ष भी सोयाबीन की फसल खराब होने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा था। लेकिन फसल के कराए गए बीमे का लाभ एक वर्ष बाद भी नहीं मिला है। इस वर्ष भी सोयाबीन की फसल खराब होने से किसानों की आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। अधिकाश खेतों में अफलन और फसल सूखने की बीमारी लगी हुई है। इससे इस वर्ष भी सोयाबीन की फसल की पैदावार घटने की आशंका बनी हुई है।
सोयाबीन फसल का पहले पत्ता और बाद में सूखता है तना
भाकिसं ने की खराब हो रही फसल का सर्वें कराने की मांग
बालागांव. जिले में हजारों हेक्टेयर रकबे में सोयाबीन एवं उड़द की बोवनी की गई है। कुछ सप्ताह से पीला मोजेक के प्रकोप से कृषक चिंतित थे, लेकिन अब वतर्मान में हो रही बारिश के कारण फसल सूखने लगी है। खरीफ फसलों को पीला मोजक रोग एवं तना मख्खी से बचाव के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ आरसी शर्मा ने किसानों को सलाह देते हुए बताया कि वर्तमान में सोयाबीन एवं उड़द के कुछ क्षेत्रों में पीला मोजक रोग तथा तना मक्खी के प्रकोप के लक्षण देखे जा रहे हैं। तना मक्खी सोयाबीन का प्रमुख कीट है यह किट पत्तों पर अंडे देता है अंडे से मेंगट निकलने पर निकटतम कोशिका को छेदती है। इसके बाद तने को खोला जाए तो उसमें लाल सुरंग मेगट देखे जा सकते हैं। पीला मोजेक रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रबंधन हेतु खेत में पीले चिपचिपी प्रपंच 12 से 15 प्रति एकड़ का प्रयोग करें।
कृषि वैज्ञानिक फसलों का निरीक्षण कर दें उचित सलाह-
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष आनंदराम किरार ने बताया कि ग्राम के दर्जनों किसानों की सैकड़ों एकड़ सोयाबीन की फसल पर बारिश के बाद सूखने लगी है। पहले पत्ता सूखता है इसके साथ ही धीरे-धीरे तना भी सूखता दिखाई दे रहा है। ऐसे में कृषकों द्वारा लाखों रुपए के नुकसान होने की आशंका जताई रही है। कृषि वैज्ञानिकों को क्षेत्र में दौरा कर कृषकों को इस वायरस से बचाने के लिए सलाह देना चाहिए। जिन कृषकों की फसल नष्ट हो रही है। उनका सर्वे कराकर मुआवजा राशि दिलाई जाना चाहिए।
इनका कहना है
जिले के अलावा पूरे मप्र में इस तरह की बीमारी फैली हुई है। इसको लेकर विभागीय टीम खेतों में पहुंचकर कृषकों को समझाइश दे रही है। अनुशंसित पूर्ण मिश्रित कीटनाशक बीटासायफ्लूथ्रीन प्लस इमिडाक्लोप्रिड या थायोमैथाक्जाम प्लस लेम्बासायहेलोथ्रीन का छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है।
कपिल बेड़ा, सहायक संचालक, कृषि विभाग, हरदा
Published on:
18 Aug 2020 08:03 am
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