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13 साल से 26 सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूलों में खेल शिक्षक

हरदा। पढ़ाई लिखाई के साथ विदयार्थी जीवन में फिजिकल फिटनेस और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने का सरकार खूब ढिंढोरा पीट रही है। खेल के जिला,संभाग,प्रदेश सहित राष्ट्रीय स्तर पर हर विधा के आयोजन हो रहे हैं,जिनके बैनर,पोस्टर,होर्डिग्स से शहर के हर चौराहे और सार्वजनिक संपत्ति पटी पड़ी है,लेकिन सरकार वास्तव में विदयार्थियों के शारीरिक विकास और खेल के जरिए नए खिलाड़ी तैयार करने में कितना गंभीर है,इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है प्रदेश में साल 2009 से खेल शिक्षकों की भर्ती ही नहीं की गई है। ऐसे में सा

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हरदा

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Mahesh bhawre

Jan 17, 2023

13 साल से 26 सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूलों में खेल शिक्षक

Sports teacher in 26 government higher secondary schools from 13 years

यह है जिले की स्थिति:
जिले में 35 सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनमें खेल शिक्षकों का नियमित स्थाई पद हैं। इनमें से जिला मुख्यालय पर डॉ.भीमराव अंबेडकर उत्कृष्ट हायर सेकेंडरी स्कूल,महात्मा गांधी बालक हायर सेकेंडरी स्कूल क्र.-2 और शासकीय कन्या शाला खिरकिया में ही खेल शिक्षक हैं। इनके अलावा हंडिया,उत्कृष्ट स्कूल खिरकिया, चारुवा,मोरगढ़ी, कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल टिमरनी व सिराली में खेल गतिविधियों के संचालन के लिए अतिथि शिक्षक रखे गए हैं। लेकिन 13 साल में 26 स्कूलों में खेल शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई।

यह नियम:
शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो हर हायर सेकेंडरी में बच्चों को खेल खिलाने और समय समय पर विभिन्न गतिविधियों के आयोजन संचालन के लिए खेल शिक्षक की नियुक्ति जरुरी है। जिससे पढ़ाई के माध्यम से मानसिक विकास के साथ साथ बच्चे खेल गतिविधियों के जरिए अपना शारीरिक विकास में भी कर सकें। बच्चों के शारीरिक विकास की चिंता सरकार के भाषणों तक ही सिमटी है। मप्र में 2009 से खेल शिक्षकों की भर्ती ही नहीं हुई। ऐसे में खेल शिक्षक विहीन स्कूलों में खेल गतिविधियों का समय समय पर होने बच्चों के लिए किसी सपने जैसा ही है। पढ़ाई के अलावा खेल गतिविधियां शून्य होने से इसका बच्चों के शारीरिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ना स्वाभाविक है। नियमित खेल गतिविधियों और सही मार्गदर्शन के अभाव में बच्चे आगे नहीं बढ़ पाते हैं।

बाक्स में
प्रशिक्षण के लिए निजी कोचिंग का सहारा मजबूरी:

कई बच्चे ऐसे हैं,जिन्हें किसी न किसी विधा के खेल में बेहद रुचि है,लेकिन सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास के अभाव में वे आगे नहीं बढ़ पाते हैं। ऐसे में आर्थिक रुप से सक्षम विदयार्थी प्रशिक्षण के लिए निजी कोचिंग और खेल संस्थानों का सहारा ले लेते हैं। जिससे वे नियमित प्रेक्टिस कर खेल में आगे बढ़कर अपना कैरियर संवार सकें।

इनका कहना है

जिले में 35 हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। इनमें से 3 में खेल शिक्षकों के पद भरे हैं। 2009 से खेल शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई,इस कारण वे खाली हैं। जिले की 6 स्कूलों में अतिथि खेल शिक्षक रखे गए हैं।
-रामनिवास जाट,जिला क्रीडा कल्याण अधिकारी,हरदा

फोटो 2 हरदा। स्टेडियम में खेलों का अभ्यास करते खिलाड़ी। फाइल फोटो।