
भाजपा विधायक का पीएम मोदी की अपील पर तंज..
Gold Purchase Ban Debate:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील पर भाजपा विधायक श्याम प्रकाश की टिप्पणी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। हरदोई की गोपामऊ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने सोशल मीडिया पर ऐसा पोस्ट किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी।
विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदू समाज में बिना मंगलसूत्र और सोने के गहनों के शादी कैसे संभव होगी। उन्होंने अपने बेटे की आगामी शादी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें चिंता है कि बिना सोने के गहनों के रिश्ते में परेशानी खड़ी हो सकती है और शादी प्रभावित हो सकती है। विधायक के इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा तेज हो गई।
श्याम प्रकाश ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कोई भक्त यह भी बता दे कि बिना मंगलसूत्र और सोने के गहनों के हिंदू विवाह कैसे होंगे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि उनके बेटे की शादी दिसंबर में है और ऐसी स्थिति में बिना गहनों के रिश्ते टूटने का खतरा बना रहेगा। विधायक ने आगे यह भी लिखा कि यदि वास्तव में एक साल तक सोना खरीदना बंद करना है, तो फिर एक साल तक शादियां ही रोक देनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के दूसरे आह्वान का जिक्र करते हुए कहा कि वह इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर भी विचार कर रहे हैं। पोस्ट वायरल होने के बाद मामला तेजी से गरमाने लगा और विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बना लिया।
विधायक का पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई लोगों ने इसे प्रधानमंत्री की अपील का विरोध बताया, तो कुछ ने इसे व्यंग्यात्मक टिप्पणी करार दिया। मामला बढ़ता देख विधायक ने बाद में अपना पोस्ट डिलीट कर दिया। हालांकि तब तक पोस्ट के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर फैल चुके थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा के भीतर से इस तरह की प्रतिक्रिया सामने आना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। वहीं विपक्ष ने इसे लेकर भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
दरअसल, 11 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक सभा के दौरान देशवासियों से अपील की थी कि वे अगले एक साल तक सोने के गहनों की खरीदारी से बचें। प्रधानमंत्री ने कहा था कि देशहित में लोगों को कुछ त्याग करना होगा और यदि घर में कोई कार्यक्रम भी हो, तब भी सोने की खरीदारी से दूरी बनानी चाहिए। प्रधानमंत्री की इस अपील को आत्मनिर्भरता और आर्थिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन भाजपा विधायक श्याम प्रकाश की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
श्याम प्रकाश इससे पहले भी कई बार अपने बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। अप्रैल 2026 में अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि पत्थरों की पूजा करने से कुछ हासिल नहीं होगा, अगर पूजा करनी है तो योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी की करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि बड़े नेता दलित समाज को भ्रमित कर अपनी राजनीति चमकाते हैं। इस बयान पर भी काफी विवाद हुआ था और बाद में विधायक को सफाई देनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था कि उनका उद्देश्य अंधविश्वास के खिलाफ बोलना था, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं।
श्याम प्रकाश का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी, लेकिन बाद में बसपा में शामिल हो गए। 1996 में बसपा के टिकट पर अहिरोरी सीट से पहली बार विधायक बने। 2004 में उपचुनाव जीतकर दोबारा विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। परिसीमन के बाद गोपामऊ सीट अस्तित्व में आई, जहां से वह 2012 में सपा के टिकट पर विधायक चुने गए। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए और 2017 तथा 2022 दोनों चुनावों में गोपामऊ सीट से जीत दर्ज की। 2009 में उन्होंने मिश्रिख लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
श्याम प्रकाश का परिवार भी सक्रिय राजनीति से जुड़ा हुआ है। उनके बेटे रवि प्रकाश गोपामऊ क्षेत्र के टड़ियावां ब्लॉक के प्रमुख हैं और स्थानीय राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। विधायक के हालिया बयान के बाद अब राजनीतिक जानकार इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है।
Published on:
12 May 2026 08:37 pm
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