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Hardoi Crime: दहेज की दरिंदगी: कार की मांग पर तेजाब पिलाई गई अंजू की आठ महीने बाद मौत

Hardoi Crime Dowry Horror: हरदोई के पिहानी क्षेत्र में दहेज उत्पीड़न की शिकार 23 वर्षीय अंजू ने आठ महीने तक इलाज के बाद दम तोड़ दिया। आरोप है कि कार की मांग पूरी न होने पर ससुराल पक्ष ने उसे जबरन तेजाब पिला दिया था। पुलिस अब मामले में हत्या की धाराएं बढ़ाने की तैयारी में है।

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हरदोई

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Ritesh Singh

Feb 12, 2026

दहेज की मांग ने ली एक और जान, तेजाब पिलाने की पीड़िता अंजू ने 8 महीने बाद तोड़ा दम (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

दहेज की मांग ने ली एक और जान, तेजाब पिलाने की पीड़िता अंजू ने 8 महीने बाद तोड़ा दम (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Dowry Horror in Hardoi: दहेज जैसी कुप्रथा ने एक बार फिर समाज को झकझोर देने वाली त्रासदी को जन्म दिया है। पिहानी कोतवाली क्षेत्र के बरम भौला गांव की रहने वाली 23 वर्षीय विवाहिता अंजू ने आठ महीने तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया। आरोप है कि ससुराल पक्ष ने कार की मांग पूरी न होने पर उसे जबरन तेजाब पिला दिया था। इस अमानवीय घटना के बाद से वह लगातार इलाज के बावजूद जिंदगी की जंग हार गई। अंजू की मौत ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

खुशियों से शुरू हुई थी कहानी

अंजू का विवाह तीन वर्ष पहले बड़े अरमानों के साथ हुआ था। लोनार क्षेत्र निवासी गुड्डू सिंह ने अपनी बेटी की शादी विनीत सिंह से की थी। परिवार ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार विवाह संपन्न कराया था, लेकिन कुछ समय बाद ही ससुराल में अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू हो गई। परिजनों के अनुसार, पति विनीत सिंह, ससुर विष्णु सिंह, सास ममता और अन्य परिजन लगातार कार की मांग को लेकर अंजू पर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाते रहे। विवाहिता पर कथित रूप से प्रताड़ना का सिलसिला बढ़ता गया।

20 मई 2025 की वह रात

परिजनों का आरोप है कि 20 मई 2025 की रात प्रताड़ना ने भयावह रूप ले लिया। आरोपियों ने कथित रूप से अंजू को जबरन तेजाब पिला दिया। घटना के बाद उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ रेफर किया गया। डॉक्टरों ने महीनों तक उसका इलाज किया। इस दौरान अंजू ने कई जटिल चिकित्सकीय प्रक्रियाए झेलीं। परिवार के सदस्य लगातार उसके पास मौजूद रहे, उम्मीद करते हुए कि वह एक दिन ठीक होकर घर लौटेगी।

आठ महीने की जंग, आखिरकार हार

करीब आठ महीने तक इलाज के बाद भी उसकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। मंगलवार रात चिकित्सकों ने परिजनों को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया और घर ले जाने की सलाह दी। बुधवार सुबह घर पहुंचने के कुछ समय बाद अंजू ने अंतिम सांस ली। इस खबर से पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। गांव और आसपास के क्षेत्र में भी घटना को लेकर आक्रोश है।

मामले में पहले से दर्ज था मुकदमा

घटना के बाद ही पुलिस ने दहेज उत्पीड़न और गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था। मुख्य आरोपी पति पहले से ही जेल में बंद बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब पीड़िता की मृत्यु के बाद मामले में हत्या की धारा जोड़ी जाएगी। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। पीड़िता की मृत्यु के बाद कानूनी धाराओं में बढ़ोतरी की जा रही है। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।”

पिता की टूटी दुनिया

अंजू के पिता गुड्डू सिंह का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी को खुशहाल जीवन देने का सपना देखा था। “हमने अपनी हैसियत से ज्यादा किया, लेकिन उन्हें कार चाहिए थी। हमें क्या पता था कि हमारी बेटी की जिंदगी यूँ खत्म कर दी जाएगी,” उन्होंने नम आंखों से कहा। यह दर्द केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की हकीकत है जो दहेज की मांग के बोझ तले बेटियों को खो देते हैं।

दहेज: कानून सख्त, मानसिकता ढीली

भारत में दहेज निषेध कानून (Dowry Prohibition Act) लागू है, फिर भी ऐसे मामले लगातार सामने आते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव जरूरी है। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि दहेज उत्पीड़न के मामलों में त्वरित न्याय और सामाजिक जागरूकता बेहद आवश्यक है। अंजू की मौत एक चेतावनी है कि दहेज की मांग केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की हत्या है। विवाह जैसे पवित्र बंधन को लालच की भेंट चढ़ाना सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर केस को मजबूत करने में जुटी है। आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। अंजू अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी कहानी समाज को आईना दिखाती है, बेटियाँ बोझ नहीं, सम्मान हैं। दहेज की मानसिकता को खत्म करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।