20 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नाबालिग की मर्जी से बना संबंध भी जुर्म…शादी करने के बाद भी कोर्ट ने सुनाया कड़ा फैसला, मिली 10 साल की सजा

हरदोई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत सख्त फैसला सुनाया। आरोपी राजेश सक्सेना ने नाबालिग लड़की के साथ संबंध बनाए, बाद में शादी की और दो बच्चे हुए।

2 min read
Google source verification

हरदोई

image

Anuj Singh

Mar 20, 2026

court news

प्रतीकात्मक फोटो

Hardoi Crime News: यूपी के हरदोई जिले में कोर्ट ने एक हैरान और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यहां विशेष न्यायाधीश ने पॉक्सो एक्ट के तहत एक युवक को 10 साल की सजा दी है। यह मामला नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का है। कोर्ट ने साफ कहा कि शादी करने से अपराध कम नहीं होता।

सजा और जुर्माना

विशेष न्यायाधीश मनमोहन सिंह ने राजेश सक्सेना नाम के युवक को 10 साल की कैद की सजा सुनाई। साथ ही 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अगर जुर्माना नहीं चुकाया तो एक महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि भले ही नाबालिग की सहमति से संबंध बने हों, कानून में इसे दुष्कर्म ही माना जाता है। नाबालिग की सहमति कोई मायने नहीं रखती। यह मामला 9 साल पुराना है और अब दोनों के दो बच्चे भी हैं।

घटना कैसे हुई?

माधौगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली किशोरी ने शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि 14 जनवरी 2017 की रात करीब 1 बजे वह अपने घर में चारपाई पर सो रही थी। तभी राजेश सक्सेना दीवार फांदकर घर में घुसा। उसने छेड़छाड़ की और दुष्कर्म करने की कोशिश की। जब लड़की ने शोर मचाया तो उसके माता-पिता जागे। राजेश डरकर भाग गया।

पुलिस जांच और चार्जशीट

पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया। पहले छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस बना। जांच के दौरान मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयानों में दुष्कर्म की बात सामने आई। इसलिए दुष्कर्म की धारा भी जोड़ी गई। कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने 4 गवाह और 9 दस्तावेजी सबूत पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुनाया।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणी

सुनवाई में पता चला कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे। पीड़िता ने कहा कि घरवालों के दबाव में उसने शिकायत दर्ज कराई। घटना के कुछ दिनों बाद दोनों ने शादी कर ली और अब उनके दो बच्चे हैं। आरोपी के वकील ने कहा कि शादी हो चुकी है, बच्चे हैं, इसलिए आरोपी को निर्दोष छोड़ दिया जाए। लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि सबूतों से साबित है कि घटना के समय लड़की की उम्र सिर्फ 13 साल 4 महीने थी। कानून की नजर में 18 साल से कम उम्र की लड़की की सहमति बिल्कुल बेकार है। इसे दुष्कर्म ही माना जाएगा। शादी या बच्चे होने से अपराध माफ नहीं होता।