
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी पर किया तीखा हमला, PC- Patrika
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के माधौगंज में आयोजित एक जनसभा के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बाहरी रूप से संन्यासी का वस्त्र पहन लेने से कोई योगी नहीं हो जाता, बल्कि काम और नीतियों से उसकी पहचान होती है।
अपने संबोधन में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर किसी का व्यवहार और काम अलग हो तथा बाहरी रूप अलग दिखे तो यह वैसा ही है जैसा रामायण में राक्षस कालनेमि ने साधु का वेश धारण कर किया था।
शंकराचार्य ने अपने भाषण में कहा कि मुख्यमंत्री ने कभी समाज में कालनेमि जैसे लोगों के होने की बात कही थी। इस पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कालनेमि वह राक्षस था जो साधु का वेश धारण कर भगवान हनुमान के सामने आया था।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गेरुआ वस्त्र पहनकर खुद को योगी कहे, लेकिन उसके शासन में गायों की संख्या कम होती जाए या गोहत्या के आरोपियों से राजनीतिक दल चंदा लेते हों, तो यह स्थिति सवाल खड़े करती है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वही कालनेमि की भूमिका निभा रहे हों।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो लोग हिंदू समाज के वोट से सत्ता में आते हैं, उनसे सवाल पूछना समाज का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर समाज को किसी बात पर शंका हो तो उसे जवाब मिलना चाहिए।
शंकराचार्य ने राजनीतिक मंचों पर दिए जाने वाले नारों का जिक्र करते हुए कहा कि मंच से एकता की बात कही जाती है, लेकिन जब कानून बनाने का समय आता है तो ऐसी नीतियां बनाई जाती हैं जो समाज को जातियों में बांट देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे समाज में आपसी टकराव बढ़ता है और राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने कहा कि जब उनसे यह सवाल किया गया कि वे शंकराचार्य कैसे हैं, तो उन्होंने कुछ ही घंटों में उसका जवाब दे दिया था। लेकिन उन्होंने भी यह सवाल उठाया कि जो खुद को बड़ा हिंदू नेता बताते हैं, वे यह स्पष्ट करें कि वे किस तरह हिंदू परंपराओं का पालन करते हैं। उनका कहना था कि इस सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिला है।
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि सरकार दावा करती है कि प्रदेश में गाय को नुकसान पहुंचाने की किसी की हिम्मत नहीं है। लेकिन उन्होंने अपने हालिया यात्रा अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि कई जगहों पर लोगों ने उन्हें गोहत्या की घटनाओं की जानकारी दी, जिन पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का कर्तव्य धर्मशास्त्र के अनुसार बोलना है, चाहे सत्ता किसी भी दल की क्यों न हो। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी विभिन्न सरकारों के समय धर्म और परंपरा के मुद्दों पर अपनी राय रखी है और आगे भी वही करते रहेंगे।
Published on:
09 Mar 2026 06:38 pm
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