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आंगनबाड़ी केंद्रों पर मनाया गया अन्नप्राशन दिवस

  इस मौके पर 6 माह पूर्ण कर चुके बच्चोँ का अन्नप्राशन कराया गया और साथ ही बच्चों की देखभाल के तौर तरीके बताए गए।

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 अन्नप्राशन दिवस

अन्नप्राशन दिवस

हाथरस। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा गुरुवार को आंगनबाड़ी केद्रों पर अन्नप्राशन दिवस मनाया गया। इस मौके पर 6 माह पूर्ण कर चुके बच्चोँ का अन्नप्राशन कराया गया और साथ ही बच्चों की देखभाल के तौर तरीके बताए गए। बच्चों को खीर, हलुआ, दलिया आदि खिलाया गया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दयानतपुर केंद्र रेनू रावत ने महिलाओं को बताया कि अगर गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाएं पौष्टिक आहार ले तो शिशु भी स्वस्थ होगा। स्तनपान कराते समय सही पोजीशन का ध्यान देना चाहिए। स्तनपान कराने से बच्चें और माँ के बीच विशेष जुड़ाव बनता हैं। बच्चे के जन्म से छह माह तक सिर्फ मां का दूध ही पिलाना चाहिए। छह माह पूरा होने पर ही मां के दूध के साथ-साथ उपरी आहार देना चाहिए। इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को इस बारे में प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र पर तीन बच्चों का अन्नप्राशन कराया गया है जिनमें तनुजा, सुरभि और राजेंद्र शामिल हैं।

शिशुओं की माताओं ने आंगनबाड़ी केन्द्रो पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की तारीफ की। नीतू ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान उन्हें शिशुओं को किस प्रकार का पौष्टिक आहार देना इसकी जानकरी मिली है। वह ज्यादा से ज्यादा इस प्रकार के कार्यक्रमों में शामिल होने का प्रयास करती हैं ताकि उन्हें अपने बच्चे को स्वस्थ रखने की जानकारी मिले।

बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) मुरसान स्तुति वर्मा ने क्षेत्र के आंगनबाड़ी केन्द्रो का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि जन्म से 6 माह तक के बच्चे को केवल माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए जिससे बच्चा स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेगा। स्तनपान करने से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है साथ ही बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास भी होता है। 6 माह तक बच्चे को कोई भी ऊपरी आहार नही देना है जैसे- पानी और शहद आदि। 6 माह का होने के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ ऊपरी आहार भी देना आवशयक है जैसे, दाल,दलिया,सब्जी,पोषाहार,आलू या उबला हुआ अंडा आदि और लगातार ऊपरी आहार के साथ-साथ दो साल तक बच्चे को स्तनपान कराना ज़रूरी है।

वहीं, सीडीपीओ राहुल वर्मा द्वारा गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर अनुपूरक आहार के महत्व पर प्रकाश डाला एवं शिशु की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया अनुपूरक आहार शिशु के आने वाले जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।