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कोरोना रिकवरी के बाद और भी घातक हो जाता है धूम्रपान करना

कारोना से संक्रमण के बाद फेफड़ों पर घाव बन जाते हैं। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी फेफड़ों पर बनें जख्मों को ठीक होने में छह माह से ज्यादा का समय लगता है। रिकवरी के तुरंत बाद जो लोग धूम्रपान करते हैं तो फेफड़ों को अधिक नुकसान होता है। साथ ही फेफड़ों की रिकवरी का समय भी बढ़ जाता है। ऐसे में तंबाकू छोडऩे की कोशिश करें।

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कोरोना रिकवरी के बाद और भी घातक हो जाता है धूम्रपान करना,कोरोना रिकवरी के बाद और भी घातक हो जाता है धूम्रपान करना

धूम्रपान से ऐसे है खतरा
कोरोना वायरस शरीर में एसीई-2 रिस्पेटर्स से शरीर के अंदर पहुंचाता है। यह एक ऐसा एंजाइम है, जिससे नाक के स्पाइक प्रोटीन से वायरस जुड़ जाता है और वायरस को फैलने में मदद करता है। स्मोकर्स में एसीई-2 की संख्या ज्यादा होने से उनमें कोराना का खतरा बढ़ जाता है।
बार-बार मुंह भी छूते हैं
तंबाकू और धूम्रपान के आदी लोग बार-बार थूकते रहते हैं। इससे आसपास के लोगों में संक्रमण का डर रहता है। ऐसे लोग बार-बार मुंह को छूते हैं तथा एक दूसरे से बीड़ी-सिगरेट साझा कर धुआं छोड़ते हैं। इससे भी कोरोना फैलता है।
अभी तंबाकू छोडऩा ज्यादा आसान
कोरोना के डर व लॉकडाउन के कारण लाखों लोगों ने तंबाकू छोड़ा है। एक्शन ऑन स्मोकिंग एंड हैल्थ संस्था के अनुसार इस दौरान 10 लाख लोगों धूम्रपान छोड़ दिया है। 5.5 लाख ने छोडऩे प्रयास किया है। 24 लाख लोगों ने नशे की मात्रा भी कम कर दी है। तंबाकू छोडऩे वालों के लिए यह सही समय है। तंबाकू छोडऩे का प्रण लें।
धूम्रपान से 40 तरह का कैंसर और 25 बीमारियां
देश में करीब 27 करोड़ लोग तंबाकू और धूम्रपान के आदी हैं। इनमें 12 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं। इस कारण हर वर्ष देश में 12 लाख की मृत्यु हो जाती है। तंबाकू से करीब 40 तरह का कैंसर और 25 तरह की दूसरी बीमारियां होती हैं। इसमें 500 तरह की हानिकारक गैसें और 7,000 से अधिक दूसरे रसायन होते हैं। धूम्रपान से 30त्न धुआं फेफड़ों और 70त्न वातावरण में जाता है। पास के लोगों को भी नुकसान होता है।
ऐसे छोड़ें तंबाकू
तंबाकू छोडऩे की इच्छा अपने परिजनों और दोस्तों को बताएं। एक बार में नहीं छोड़ पाते हैं तो मात्रा धीरे-धीरे कम करें। अपनी आदतों और शौक को बढ़ावा दें। उनमें व्यस्त हों। इसकी तलब होने किसी कार्य में खुद को व्यस्त रखें। टहलना शुरू कर दें। ऐसे दोस्तों से दूरी बनाएं जो नशा करते हैं। अगर फिर नहीं छोड़ पा रहे हैं तो काउंसलिंग भी करवाएं।
2015-16 के आंकड़ों के अनुसार तंबाकू से हर वर्ष 31 हजार करोड़ रु. की आय होती है जबकि तंबाकू से होने वाली बीमारियों पर एक लाख करोड़ रु. से अधिक खर्च हुआ था।स्रोत- वित्त मंत्रालय
डॉ. सूर्यकांत, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, केजीएमयू, लखनऊ एवं नेशनल वाइस चेयरमैन (आइएमए-एएमएस)

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