
कोरोना के बाद से डायबिटीज में दो तरह के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज की समस्या नहीं थी लेकिन कोरोना गंभीर होने के बाद उनके पैंक्रियाज पर असर पड़ा। बीटा सेल्स में इंसुलिन बनने की प्रक्रिया तेज हुई व शुगर बढ़ गया। दूसरा : करीब आधे मरीजों में डायबिटीज स्थाई थी। शेष में यह स्थाई हो गई। कोरोना में मरीजों को अधिक मात्रा में स्टेराइड दिया गया।
जिन्हें पहले से शुगर है
ऐसे मरीज जिन्हें पहले से ही डायबिटीज है और कोरोना हुआ था। वे विशेष सावधानी बरतें। जिन्हें माइल्ड लक्षण थे उन्हें दवाइयों में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है लेकिन मॉडरेट व गंभीर हो चुके मरीज दवाएं डॉक्टरी सलाह से ही लें।
जिन्हें सांस लेने में तकलीफ थी
कोरोना के दौरान जिन मरीजों को सांस लेने में तकलीफ या ऑक्सीजन का स्तर कम हुआ था और पहले से डायबिटीज थी तो उन्हें डॉक्टरी सलाह से दवाओं में बदलाव करना चाहिए। हर 3-4 माह में चेकअप कराएं। विशेष रूप से अपनी दिनचर्या नियमित रखें।
बूस्टर डोज लगवाएं
पिछली बार भी देखा गया है कि कोरोना होने पर डायबिटीज के रोगियों की स्थिति अचानक से गंभीर हो रही थी। हमें अब कोरोना के साथ ही रहना पड़ेगा। ऐेसे में डायबिटीज के रोगियों को आवश्यक रूप से बूस्टर डोज लगवानी चाहिए।
गंभीर कोरोना वाले क्या करें
जिनमें कोरोना गंभीर हो चुका है और उनकी उम्र 40 से अधिक है या फिर उनकी फैमिली में डायबिटीज, अधिक वजनी है या फिर दिनचर्या अनियमित है उनको 3-4 माह के अंतराल पर अपना ब्लड शुगर टेस्ट करवाते रहना चाहिए।
Updated on:
07 Oct 2023 06:00 pm
Published on:
07 Oct 2023 05:59 pm
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