
Nipah Virus Outbreak (photo- freepik)
Nipah Virus Outbreak: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मामलों की पुष्टि के बाद देश के कई राज्यों में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। तमिलनाडु में स्वास्थ्य अधिकारियों को निगरानी और तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही झारखंड में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है, क्योंकि वह पश्चिम बंगाल से सटा हुआ राज्य है और लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सरकारी और निजी अस्पतालों पर नजर रखने को कहा है। खासतौर पर उन मरीजों पर ध्यान देने के निर्देश हैं, जिनकी हाल ही में पश्चिम बंगाल की यात्रा की हिस्ट्री रही हो। बंगाल से तमिलनाडु आने वालों में प्रवासी मजदूर, कामकाज के सिलसिले में आने वाले लोग और इलाज के लिए आने वाले मेडिकल टूरिस्ट शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल में मिले मामलों को देखते हुए झारखंड में भी स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। सीमावर्ती जिलों में खासतौर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले की समय रहते पहचान की जा सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। यह वायरस आमतौर पर फल खाने वाले चमगादड़ों और सूअरों से इंसानों तक पहुंचता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीबी संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है, खासकर खांसी, छींक या शरीर के तरल पदार्थों के जरिए।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक निपाह, कोरोना की तरह बहुत तेजी से नहीं फैलता। यह मुख्य रूप से संक्रमित बूंदों और सीधे संपर्क से फैलता है। इसलिए संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों पर कम से कम 21 दिन तक नजर रखना जरूरी होता है।
निपाह वायरस के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत और कुछ मामलों में बेहोशी या दिमाग से जुड़ी परेशानी शामिल हो सकती है। अगर किसी को ये लक्षण हों और हाल में पश्चिम बंगाल या झारखंड की यात्रा की हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
निपाह वायरस को गंभीर बीमारी माना जाता है क्योंकि इसमें मौत का खतरा ज्यादा होता है। अलग-अलग प्रकोप में इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक देखी गई है, और कुछ जगहों पर यह और भी ज्यादा रही है। हालांकि तमिलनाडु में फिलहाल निपाह का कोई मामला सामने नहीं आया है।
जिन लोगों का संपर्क फल खाने वाले चमगादड़ों वाले इलाकों से रहता है, जैसे पुराने कुएं, गुफाएं, जंगल या फल के बाग, उनमें जोखिम ज्यादा होता है। इसके अलावा बीमार सूअरों या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने वाले लोग भी हाई रिस्क में माने जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। साफ-सफाई का ध्यान रखें, बिना धुले फल न खाएं और किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही जानकारी ही निपाह जैसे खतरनाक वायरस से बचाव का सबसे मजबूत तरीका है।
Updated on:
19 Jan 2026 11:27 am
Published on:
19 Jan 2026 11:27 am
