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आपकी सेहत पर भारी पड़ेगा मिडिल ईस्ट का तनाव, महंगी हो सकती हैं Paracetamol से लेकर डायबिटीज की दवा

Medicine Price Hike India: Middle East तनाव का असर भारत की दवा इंडस्ट्री पर दिख रहा है। जानिए क्यों बढ़ रही हैं दवाइयों की कीमतें और मरीजों पर इसका क्या असर होगा।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 19, 2026

Medicine Price Hike India

Medicine Price Hike India (Photo- gemini ai)

Medicine Price Hike India: मध्य पूर्व में Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के हेल्थ सेक्टर पर भी दिखने लगा है। खासकर दवाइयों की सप्लाई और कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। डॉक्टरों और दवा कंपनियों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में मरीजों को दवाइयों की कमी, देरी और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। जैसे कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दवा Paracetamol, जो बुखार और दर्द में सबसे पहले ली जाती है, वह भी महंगी हो सकती है या आसानी से उपलब्ध नहीं होगी।

सिर्फ यही नहीं, एंटीबायोटिक्स, डायबिटीज और दिल की दवाइयां भी प्रभावित हो सकती हैं। अगर दवाइयां समय पर नहीं मिलेंगी, तो मरीजों को दिक्कत हो सकती है। कभी दवा बदलनी पड़ेगी या ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।

अचानक क्यों बढ़ रही हैं दवाइयों की कीमत?

असल में दवा बनाने के लिए जो कच्चा माल (raw material) इस्तेमाल होता है, उसकी कीमत अचानक बहुत बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जरूरी चीजों की कीमत सिर्फ 15 दिनों में 200-300% तक बढ़ गई है। उदाहरण के लिए, पैरासिटामोल बनाने की लागत करीब 250 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 450 रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा, दवाइयों की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले एल्यूमिनियम फॉयल, प्लास्टिक और ग्लास की कीमत भी तेजी से बढ़ रही है।

सप्लाई चेन पर असर

मध्य पूर्व के तनाव के कारण शिपिंग रूट्स प्रभावित हुए हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी और धीमी हो गई है। साथ ही पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की कमी भी हो रही है, जो दवाइयों और पैकेजिंग दोनों के लिए जरूरी होते हैं।

छोटी कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव

छोटी और मझोली दवा कंपनियां (MSMEs) इस समय सबसे ज्यादा परेशान हैं। ये कंपनियां सस्ती जेनेरिक दवाइयां बनाती हैं, लेकिन बढ़ती लागत के कारण इनके लिए प्रोडक्शन जारी रखना मुश्किल हो रहा है। कई कंपनियां अब कुछ दवाइयों का उत्पादन कम करने या बंद करने का सोच रही हैं। अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर सीधे मरीजों और अस्पतालों पर पड़ेगा। दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाली इंडस्ट्रियल LPG की कमी की भी खबरें आ रही हैं। अगर यह समस्या बढ़ी, तो दवा उत्पादन और धीमा हो सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

दवा इंडस्ट्री ने सरकार से मदद मांगी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि कच्चे माल की कीमतों को कंट्रोल किया जाए, सप्लाई चेन पर नजर रखी जाए और जरूरी कदम उठाए जाएं। यह मामला सिर्फ दवा कंपनियों का नहीं, बल्कि हर आम आदमी की सेहत से जुड़ा है। अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में साधारण दवाइयां भी महंगी या कम उपलब्ध हो सकती हैं।