12 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ईरान-अमेरिका युद्ध: पैरासिटामोल के दाम 26%, ग्लिसरीन की कीमत 64% बढ़ी

MP News: दवा कंपनियों ने सरकार से दवाइयों की कीमतों में अस्थायी वृद्धि की अनुमति देने की मांग की है।

2 min read
Google source verification
medicines (Photo Source- freepik)

medicines (Photo Source- freepik)

MP News: मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब दवा उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग प्रभावित होने से फार्मास्यूटिकल कंपनियों की उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है। कच्चे माल, सॉल्वेंट्स और परिवहन खर्च में भारी बढ़ोतरी के कारण दवा कंपनियों ने सरकार से दवाइयों की कीमतों में अस्थायी वृद्धि की अनुमति देने की मांग की है।

फार्मा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोकेमिकल्स से बनने वाले फार्मास्यूटिकल सॉल्वेंट्स की कीमतों में पिछले एक सप्ताह के दौरान 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे दवाइयों के निर्माण की लागत पर सीधा असर पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण कच्चे माल की कीमतों में 60 प्रतिशत से अधिक तक की वृद्धि हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर ग्लिसरीन की कीमत दिसंबर से अब तक लगभग 64% बढ़ गई है, जबकि पैरासिटामोल के दाम में 26% बढ़े हैं।

बढ़ती लागतों को वहन करना हो रहा कठिन

मप्र ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सचिव अजय सिंह ने बताया आवश्यक दवाइयों की कीमतें सरकार द्वारा नियंत्रित होती हैं, इसलिए कंपनियों के लिए इन बढ़ती लागतों को वहन करना कठिन हो रहा है। इसी कारण उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार और नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी से ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर के नियमों से ऊपर जाकर दवाइयों की कीमतों में संशोधन की अनुमति देने का आग्रह किया है।

सऊदी अरब ओमान बड़े आयातक

भारत से निर्यात होने वाली सस्ती जेनेरिक दवाइयों पर कई देशों की निर्भरता भी इस स्थिति को महत्वपूर्ण बनाती है। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान जैसे देश भारतीय दवाइयों के बड़े आयातक हैं। ऐसे में आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है। यदि स्थिति लंबी खिचती है तो इसका असर दवा उत्पादन, निर्यात और घरेलू बाजार की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। एमएसएमई फार्मा निर्यातकों ने सरकार से बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत को संतुलित करने के लिए फ्रेट सब्सिडी देने की मांग की है।