सावधान : काढ़ा, हल्दी दूध ज्यादा पीने से हो सकती है दिक्कत

कोरोना से बचाव के लिए हर कोई इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में जुटा है। इसके लिए सबसे ज्यादा लोग हल्दी-दूध, आयुर्वेदिक काढ़े का प्रयोग कर रहे हैं। तय मात्रा से अधिक व विपरीत समय पर लेने से इसके कई दुष्प्रभाव भी होते हैं। एसिडिटी, अपच, गले में जलन, यूरिन आदि में दिक्कतें होती हैं। जानते हैं इसके बारे में-

By: Ramesh Singh

Updated: 16 Aug 2020, 10:11 PM IST

आयुर्वेद के अनुसार काढ़े को तय मात्रा में लेने व सही तरीके से बनाने से फायदा मिलता है। यह मौसमी बीमारियों व शरीर की प्रतिरोधकता को मजबूत बनाता है।

तय मात्रा से अधिक और बार-बार लेने से परेशानी
हल्दी में लाइपोपॉलीसकराइड तत्त्व प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। यह डिटॉक्सिफाई करने में मदद करती है। इसलिए लोग रात में सोते समय हल्दी-दूध का प्रयोग कर रहे हैं। सर्दी, जुकाम के साथ फेफड़ों में जमा कफ भी निकालने में मदद करती है। धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है। इसमें मौजूद करक्यूमिन कैंसर सेल्स को बढऩे से रोकता है, यह पित्ताशय को उत्तेजित करती है, जिससे पाचन सुधरता है। कई लोग दिन में दो से तीन बार व अधिक मात्रा में प्रयोग कर रहे हैं। जिन्हें पित्ताशय, लिवर से जुड़ी समस्या है, गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक की सलाह बिना नहीं लेना चाहिए। तासीर गरम होने के कारण ज्यादा लेने से पाचन संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैंं।

ऐसे बनाएं काढ़ा

साम्रगी: तुलसी के पत्ते 5 नग, लौंग 5 नग, काली मिर्च 2 नग, छोटी इलायची 5 नग, अदरक रस एक चम्मच, चाय पत्ती एक चम्मच, अश्वगंधा एक चम्मच, गिलोय रस 5 चम्मच, थोड़ा गुड़।
ऐसे बनाएं : आधा लीटर पानी में मिलाकर पांच मिनट तक उबाल लें। इसे दो बार में पीएं।

ज्यादा लेने से बचें : शरीर में गर्मी बढऩा, मुंह में छाले पडऩा, पेट में जलन, अपच हो सकता है।
गिलोय, इलायची के अलावा अन्य चीजों की प्रकृति गर्म होती है। अधिक प्रयोग से दिक्कत होती है। गर्म तासीर वालों को जल्दी नुकसान पहुंचा सकता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से प्रयोग करें।

ये सावधानी भी जरूरी
काढ़े के सेवन से कफ, खांसी ठीक होती है। शरीर में शक्ति बढ़ाता है।, अच्छी नींद आती है।
1. कफ प्रकृति के लोगों के लिए फायदेमंद है। वात-पित्त प्रकृति के लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
2. आयुर्वेद काढ़ा व अन्य आयुर्वेद औषधियां मौसम की प्रकृति, उम्र और स्थिति के अनुसार दी जाती है। ध्यान न रखने से दिक्कत हो सकती है।
च्यवनप्राश : यदि काढ़े के प्रयोग से कोई दिक्कत होती है तो इसका प्रयोग तुरंत बंद कर दें। च्यवनप्राश (अष्ठवर्ग) एक-एक चम्मच सुबह शाम ले सकते हैं। यह भी उतना ही लाभकारी है।

एक्सपर्ट : वैद्य बंकटलाल पारीक वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ, जोधपुर

Ramesh Singh
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