
देशभर में हल्दी एक बेहद लोकप्रिय मसाला है। सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। कच्ची हल्दी को जहां सब्जी व आचार के रूप में पसंद किया जाता है, वहीं पिसी हल्दी मसाले के रूप में काम आती है। हल्दी का दूध भी कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। धीरे—धीरे हल्दी की चाय भी लोकप्रिय हो रही है।

हल्दी की चाय रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। आयुर्वेदिक और चीनी चिकित्सा में हजारों वर्षों से लोग इसे एक हर्बल उपचार के रूप में उपयोग करते आ रहे हैं। भारत हल्दी की वैश्विक आपूर्ति का 78% उगाता है। हल्दी में सक्रिय तत्व करक्यूमिन है, इसकी वजह से ही उसका रंग पीला होता है। करक्यूमिन में सूजन-रोधी और प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं।

शोध के अनुसार करक्यूमिन एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीवायरल और जीवाणुरोधी गुणों के साथ प्रतिरक्षा समारोह में सुधार करने में सक्षम हो सकता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि करक्यूमिन में हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद गुण होते हैं, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी के रूप में कार्य करता है। करक्यूमिन रक्त को पतला करने, कोलेस्ट्रॉल को कम करने और धमनियों के संकुचन को रोकने में मदद कर सकता है। इससे हृदय संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है। हल्दी लिवर को भी हैल्दी रखती है। इसके नियमित सेवन से लिवर को क्षति और पित्त पथरी से बचाता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि करक्यूमिन लीवर की क्षति से बचा सकता है। वहीं पारंपरिक औषधियों में हजारों वर्षों से डायबिटीज के लिए हल्दी का उपयोग किया जाता रहा है। डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।