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एंटीवायरल और एंटी बायोटिक गुणों से भरपूर होती है गिलोय, रोज सेवन के हैं जबरदस्त फायदे

आयुर्वेद में इसे रसायन माना गया है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Jun 20, 2020

एंटीवायरल और एंटी बायोटिक गुणों से भरपूर होती है गिलोय, रोज सेवन के हैं जबरदस्त फायदे

एंटीवायरल और एंटी बायोटिक गुणों से भरपूर होती है गिलोय, रोज सेवन के हैं जबरदस्त फायदे

बड़े-बुजुर्गों के मुंह से अक्सर घरेलू उपायों में गिलोय (Giloy) की बेल के चमत्कारी गुणों के बारे में तो हम सभी ने सुना होगा। इसके औषधीय गुणों के कारण इसे आयुर्वेद में अमृता भी कहा जाता है। गिलोय के बारे में आयुर्वेदिक ग्रंथों में बहुत सारी फायदेमंद बातें बताई गई हैं। आयुर्वेद में इसे रसायन माना गया है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। यूं तो गिलोय के पत्ते स्वाद में कसैले, कड़वे और तीखे होते हैं। गिलोय का उपयोग कर वात-पित्त और कफ को ठीक किया जा सकता है। यह पचने में आसान होती है, भूख बढ़ाती है, साथ ही आंखों के लिए भी लाभकारी होती है। आप गिलोय के इस्तेमाल से प्यास, जलन, डायबिटीज, कुष्ठ और पीलिया रोग में भी लाभ ले सकते हैं। इसके साथ ही यह वीर्य और बुद्धि बढ़ाती है एवं बुखार, उलटी, सूखी खांसी, हिचकी, बवासीर, टीबी, मूत्र रोग में भी रामबागण का काम करती है। इतना ही नहीं महिलाओं में शारीरिक कमजोरी की स्थिति में यह बहुत अधिक लाभकारी है।

गिलोय अमृता या अमृतवल्ली अर्थात कभी न सूखने वाली एक बड़ी लता है। इसका तना देखने में रस्सी जैसा लगता है। इसके कोमल तने तथा शाखाओं से जडें निकलती हैं। इसके पत्ते कोमल तथा पान के आकार के और फल मटर के दाने जैसे होते हैं। यह जिस पेड़ पर चढ़ती है, उस वृक्ष के कुछ गुण भी इसके अन्दर आ जाते हैं। इसीलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय सबसे अच्छी मानी जाती है। आधुनिक आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार गिलोय नुकसानदायक बैक्टीरिया से लेकर पेट के कीड़ों को भी खत्म करती है। टीबी रोग का कारण बनने वाले वाले जीवाणु की वृद्धि को रोकती है। आंत और यूरीन सिस्टम के साथ-साथ पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले रोगाणुओं को खत्म कर देती है।

गिलोय के फायदे (Giloy Benefits and Uses)
गिलोय के औषधीय गुण और गिलोय के फायदे बहुत तरह के बीमारियों के लिए उपचारस्वरूप इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सही जानकारी न होने पर यह कई बार सेहत पर उल्टा असर भी डालती है। इसलिए गिलोय का औषधीय प्रयोग, प्रयोग की मात्रा और तरीके का सही ज्ञान होना ज़रूरी है।
आंखों के रोग: आंखों के रोग में गिलोय के औषधीय गुण राहत दिलाते हैं। इससे अंधेरा छाना, आंखों में चुभन और काला तथा सफेद मोतियाबिंद रोग ठीक होते हैं। गिलोय रस में त्रिफला मिलाकर काढ़ा बनायें। सुबह और शाम सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
कान के रोग: कान की बीमारी में भी गिलोय फायदेमंद है। गिलोय के तने को पानी में घिसकर गुनगुना कर लें। इसे कान में 2-2 बूंद दिन में दो बार डालने से कान का मैल निकल जाता है।

हिचकी को रोके:गिलोय तथा सोंठ के चूर्ण को नसवार की तरह सूंघने से हिचकी बन्द होती है। गिलोय चूर्ण एवं सोंठ के चूर्ण की चटनी बना लें। इसमें दूध मिलाकर पिलाने से भी हिचकी आना बंद हो जाती है।
टीबी रोग में लाभकारी: गिलोय का औषधीय गुण टीबी रोग के समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करते हैं गिलोय के साथ अश्वगंधा, शतावर, दशमूल, बलामूल, अडूसा, पोहकरमूल तथा अतीस को बराबर भाग में लेकर इसका काढ़ा बनाएं। 20-30 मिली काढ़ा सुबह और शाम सेवन करने से टीबी की बीमारी ठीक होती है।

उलटी में कारगर: गिलोय के सेवन से उल्टी रुकती है। एसिडिटी के कारण उल्टी हो तो 10 मिली गिलोय रस में 4.6 ग्राम मिश्री मिला लें। इसे सुबह और शाम पीने से उल्टी बंद हो जाती है। 20.30 मिली गुडूची के काढ़ा में मधु मिलाकर पीने से बुखार के कारण होने वाली उलटी बंद होती है।
कब्ज का इलाज: गिलोय को 10-20 मिली रस के साथ गुड़ का सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है। सोंठ, मोथा, अतीस तथा गिलोय को बराबर भाग में लेकर जल में खौला कर काढ़ा बनाएं। इस काढ़ा को 20-30 मिली की मात्रा में सुबह और शाम पीने से अपच एवं कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।

बवासीर का उपचार: हरड़, गिलोय तथा धनिया को बराबर भाग 20 ग्राम लेकर आधा लीटर पानी में पका लें। जब एक चौथाई रह जाए तो खौलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा में गुड़ डालकर सुबह और शाम पीने से बवासीर की बीमारी ठीक होती है। काढ़ा बनाकर पीने पर ही गिलोय के फायदे पूरी तरह से मिल सकते हैं।
पीलिया रोग में लाभ: गिलोय के औषधीय गुण पीलिया से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं। गिलोय के 20-30 मिली काढ़ा में 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार पिलाने से पीलिया रोग में लाभ होता है। गिलोय के 10-20 पत्तों को पीसकर एक गिलास छाछ में मिलाकर तथा छानकर सुबह के समय पीने से पीलिया ठीक होता है। गिलोय के तने के छोटे-छोटे टुकड़ों की माला बनाकर पहनने से भी पीलिया रोग में लाभ मिलता है।

लीवर विकार को ठीक करे: 18 ग्राम ताजी गिलोय, 2 ग्राम अजमोद, 2 नग छोटी पीपल एवं 2 नग नीम को लेकर सेंक लें। इन सबको मसलकर रात को 250 मिली जल के साथ मिट्टी के बरतन में रख दें। सुबह पीसकर छानकर पिला दें। 15 से 30 दिन तक सेवन करने से लीवन व पेट की समस्याएं तथा अपच की परेशानी ठीक होती है।
मधुमेह में अचूक: डायबिटीज की बीमारी में गिलोय कंट्रोल करने में कारगर है। गिलोय, खस, पठानी लोध्र, अंजन, लाल चन्दन, नागरमोथा, आवंला और हरड़ लें। इसके साथ ही परवल की पत्ती, नीम की छाल तथा पद्मकाष्ठ लें। इन सभी द्रव्यों को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकरए छानकर रख लें। इस चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा में लेकर मधु के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें। इससे डायबिटीज में लाभ होता है।

कुष्ठ रोग में लाभकारी: 10-20 मिली गिलोय के रस को दिन में दो-तीन बार कुछ महीनों तक नियमित पिलाने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
बुखार उतारे गिलोय: 40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह मसलकर मिट्टी के बरतन में रख लें। इसे 250 मिली पानी मिलाकर रात भर ढककर रख लें। इसे सुबह मसलकर-छानकर प्रयोग करें। इसे 20 मिली की मात्रा दिन में तीन बार पीने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है।

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डिस्क्लेमर- सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। राजस्थान पत्रिका इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।