
ग्राम भानगढ़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र
बीना. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं दिनोंदिन बदहाल होती जा रही हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए भवन तो बना दिए गए हैं, लेकिन स्टाफ न होने से मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टर या फिर सिविल अस्पताल आकर इलाज कराने मजबूर हैं।
ग्राम भागनढ़ में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया है, जहां प्रसव कराने तक की व्यवस्था है, लेकिन यहां सर्दी, खांसी का इलाज भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। यहां पदस्थ डॉ. पल्लवी यादव कभी-कभार ही पहुंचती हैं और सिविल अस्पताल में सेवाएं दे रही हैं। यहां तीन स्टाफ नर्स होना चाहिए, लेकिन एक भी नर्स नियुक्त नहीं हैं। इसके अलावा अन्य स्टाफ नियुक्त नहीं हो पाया है। शुक्रवार की दोपहर एक ग्रामीण केन्द्र पर दवाएं लेने पहुंचा, तो वहां सिर्फ ऑपरेटर बैठा था और कोई मौजूद नहीं था, जबकि इस स्वास्थ्य केंद्र पर करीब तीन दर्जन गांव निर्भर हैं। ग्रामीणों को जब इलाज की जरूरत पड़ती है, तो गांव में मौजूद झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है, जिससे कई बार स्वास्थ्य में सुधार होने की जगह गंभीर हालत हो जाती है। बहुत से लोग बीस से तीस किमी दूर सिविल अस्पताल इलाज कराने आते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
आगासौद, मंडीबामोरा के भी यही हाल
आगासौद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मंडीबामोरा के भी यही हाल हैं। यहां भी स्टाफ पर्याप्त नहीं हैं, जबकि ग्रामीणों द्वारा बार-बार मांग भी की जाती है। आगासौद में, तो नया भवन भी नहीं बन पा रहा है और जर्जर भवन में स्टाफ बैठता है।
झोलाछाप डॉक्टरों की बढ़ रही संख्या
सरकारी व्यवस्थाएं लचर होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या बढ़ रही है और पूरी अस्पताल चल रहा है। भानगढ़, आगासौद क्षेत्र में यह ज्यादा सक्रिया है।
नहीं है स्टाफ
भानगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। वहां पदस्थ डॉक्टर आठ दिन सिविल अस्पताल में सेवाएं देती हैं। अभी पीजी की परीक्षा के कारण 23 जून तक छुट्टी पर हैं।
डॉ. अरविंद गौर, बीएमओ
Published on:
08 Jun 2024 12:25 pm

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