
heart disease
हार्ट अटैक कितना गंभीर रोग है, इसका अंदाजा दुनिया भर में हो रही मौतों से बखूबी लगाया जा सकता है। जी हां, मौजूदा दौर में हो रही मौतों की मुख्य वजह हार्ट फेल होना है। इतना ही नहीं, इसका समुचित इलाज करा भी लिया, फिर भी यदि दिल हमेशा के लिए कमजोर हो जाए, तो यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन जाता है। ऐसे व्यक्ति को जान जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। इस समस्या के समाधान की तलाश में अमेरिका समेत अन्य विकसित देशों के हृदय रोग विशेषज्ञ शोध-अनुसंधान कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार हार्ट अटैक और कालांतर में हार्ट फेल की समस्या को नियंत्रित करने की सबसे कारगर चिकित्सा पद्धतियों में स्टेम सेल थेरेपी प्रमुख है।
क्या होता है हृदय रोग ...
हृदय रोग होने पर हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनिया संकरी और सख्त हो जाती हैं, जिससे ब्लड शरीर के अंगों में सही मात्रा में पंप नहीं हो पता है। ब्लड में जब वसा की मात्रा अधिक हो जाती है, तो अतिरिक्त कोलेस्ट्रोल हृदय की धमनियों की भीतरी दीवारों पर एकत्रित होने लगता है और धमनियों के भीतर निरंतर 'वसा' की परत जमने से धीरे-धीरे धमनियों संकरी और कड़ी हो जाती हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। दरअसल हृदय का मुख्य कार्य आक्सीजन मिला शुद्ध ब्लड को बाकी अंगों तक पंहुचाना होता है, जिसकी आपूर्ति हृदय की धमनियों 'कोरोनरी आर्टरीज" से मिलती है। हृदय रोग की शुरुआत में आराम की अवस्था में पेशेंट का किसी प्रकार काम चलता रहता है और उसे ज्यादा कुछ अहसास नहीं होता है, पर भारी काम करने पर परेशानी होने लगती है।
हार्ट डिसीज के लक्षण...
शुरू-शुरू में हृदय के रोग के कोई विशेष लक्षण अनुभव नहीं होते हैं, लेकिन जब पेशेंट को कोई शारीरिक परिश्रम जैसे दूर तक पैदल चलना, सीढिय़ां, पहाड़ आदि चढऩा, दौडऩा आदि कार्य करने पड़ते हैं, तो शारीरिक श्रम के दौरान रोग के प्रारंभिक लक्षण सामने आ जाते हैं।
ऐसी स्थिति में पेशेंट को सांस चढऩा, सीने में दर्द, कंधों और पीठ में दर्द होना, भारीपन प्रतीत होना, दम घुटना, सीने में सिकुडऩ जैसे लक्षणों का अनुभव होने लगता है।
पूरी तरह से हृदय रोग हो जाने पर जब ब्लड की धमनी के भीतर वसा की परतें जम जाने से वह पूर्ण रूप से बंद हो जाती हैं अथवा खून का थक्का (ब्लड क्लोट) बन जाने से धमनी में ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है और हृदय को ऑक्सीजनयुक्त ब्लड मिलना बिल्कुल बंद हो जाता है, तब सीने में अचानक असहनीय तेज दर्द उठता है, जिसे 'दिल का दौरा' (हार्ट अटैक) कहा जाता है।
हार्ट अटैक के लक्षण...
- घबराहट होना
- सांस लेने में कष्ट होना
- हृदय का अनियमित धड़कना
- हृदय में तेज पीड़ायुक्त झटके अनुभव होना
- पसीना छूटना, चक्कर आना, जी मिचलाना, तीव्र कमजोरी का अनुभव होना अथवा बेहोश हो जाना आदि।
याद रखें दिल के दौरे का दर्द आराम करते हुए भी बना रहता है। एंजाइना का दर्द थकान के कारण होता है और आराम करने से दूर हो जाता है और उससे रक्तचाप और हृदय की धड़कन पर कुछ विशेष प्रभाव न पड़े तो ऐसी स्थिति में घबराने की कोई बात नहीं है।
यदि थकान से आरंभ हुआ दर्द विश्राम के बाद भी समाप्त नहीं होता और दर्द निवारक (एनालजैसिक्स) दवाइयों के सेवन से भी कोई लाभ न मिले तो समझना चाहिए कि 'दिल का दौरा' पड़ रहा है तो ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द किसी (हृदय रोग विशेषज्ञ) चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और गंभीरतापूर्वक रोगी का उपचार कराना चाहिए।
हार्ट पेशेंट को क्या खाना चाहिए...
- हार्ट डिसीज में बिना दाने वाला अनार, आंवले का मुरब्बा, सेब, सेब का मुरब्बा, नींबू का रस, अंगूर, थोड़ा-सा गुनगुना गाय का दूध, जौ (जई) का पानी, कच्चे नारियल का पानी, गाजर, पालक, लहसुन, कच्चा प्याज, छोटी हरडु, सौंफ, मेथीदाना, किशमिश, मुनक्का।
- इसके अलवा गाय के दूध की दही से बिलोकर तैयार किया गया शुद्ध घी (सीमित प्रयोग), गेहूं का दलिया, चोकरयुक्त मोटे गेहूं के आटे की रोटी, चना और जौ मिश्रित आटे की मिस्सी रोटी, भिगोए हुए चने (अल्प मात्रा में), भुने चनों का नियमित सेवन, बिना पालिश का चावल (ओखली-मूसल से कूटा गया फाइबर युक्त धान का अथवा धनकुट्टी से निकाला गया चावल)
- हरी सब्जियां, ताजे फल, कम चिकनाई युक्त बिना मलाई वाला दूध से निर्मित खाद्य पदार्थ इत्यादि भी हृदय रोग में नियमित रूप से लेने चाहिए।
- भोजन करने बाद दोनों समय (दोपहर व रात को) वज्रासन तथा थकान अनुभव करने पर 'शवासनÓ करना चाहिए।
- ह्रदय रोगियों या अन्य लोगों को भी जो दिल की बीमारियों को दूर रखना चाहते हैं हमेशा शाकाहारी भोजन, योगाभ्यास करना चाहिए।
- अर्जुन की छाल, आंवला, हरड़ जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के उचित प्रयोग से हार्ट डिसीज होने का खतरा कम हो जाता है।
- हार्ट डिसीज से बचने के लिए नियमित व्यायाम की दिनचर्या के साथ ही तनावरहित गहरी नींद, यथोचित विश्राम और संयमित जीवनयापन निरोग रहने की सफल कुंजी है।
-आंवला एक उच्चकोटि का रसायन है। यह रक्त में उपस्थित हानिकारक व विषैले पदार्थों को निकालने में सक्षम है। इसके नियमित प्रयोग से रक्तवाहिनियां कोमल और लचीली बनी रहती हैं तथा रक्तवाहिनियों की दीवारों की कठोरता दूर होकर रक्त का प्रवाह (ब्लड सकुलेशन) भली-भांति होने लगता है।
रक्तवाहिनियों में लचक बने रहने के कारण न तो हृदय फेल होता है, न उच्च रक्तचाप का रोग होता है और न ही रक्त का थक्का (क्लोट) बन सकने के कारण (रुकावट के कारण) मस्तिष्क की धमनियां फटने नहीं पाती हैं।
सच तो यह है कि हार्ट डिसीज होने का मूल कारण गलत खान-पान और गलत रहन-सहन यानी आधुनिक आरामदायक मशीनों से घिरी लाइफ स्टाइल ही है।
हार्ट डिसीज में क्या ना खाएं ...
हार्ट डिसीज से बचने के लिए मांसाहार, शराब, धूम्रपान, तम्बाकू, कॉफी , नशीले पदार्थों का सेवन, अधिक नमक, घी, तेल , तेज मसालेदार चटपटे तले-भुने गरिष्ठ भोज्य पदार्थ, आधुनिक फास्टफूड (नूडल्स, पिज्जा, बर्गर आदि तथा जंक फूड-चाकलेट, केक , पेस्ट्री, आइसक्रीम आदि का सेवन न करें या कम से कम करें।
हार्ट डिसीज होने सबसे बड़ा कारण कोलेस्ट्रॉल होता है। कोलेस्ट्रॉल खुद फैट से बना होता है और प्रोटीन से मेल करके लिपोप्रोटीन बनाता है। प्रोटीन से दोस्ती के बाद ही यह अच्छा और बुरा बन जाता है। अच्छा कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल-हाई डेसिटी लिपोप्रोटीन) हल्का होता है और खून से मिलने वाली चर्बी को अपने साथ बहा ले जाता है। बुरा कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल-लो डेसिटी लिपोप्रोटीन) चिपचिपा और गाढ़ा होता है और रक्त वाहिनियों और धमनियों में चिपककर बैठ जाता है। इससे खून के बहने में बाधा आती है और हमारे दिल को वाहिनियों में खून पहुंचाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। नतीजा हाई ब्लड प्रेशर , ब्लोकेज और हार्ट अटेक के रूप में सामने आता है, इसलिए हार्ट डिसीज को रोकने के लिए कोलेस्ट्रॉल से बचना बहुत जरूरी हैं।
स्टेम सेल क्या है?
मनुष्य का शरीर असंख्य कोशिकाओं से बना हुआ है। कोशिकाओं के अपने कार्य होते हैं। स्टेम कोशिका विभाजित होने के बाद भी फिर से पूर्ण रूप धारण कर लेती है। इससे करीब-करीब शरीर की सभी कोशिकाओं को निर्मित किया जा सकता है। अन्य कोशिकाएं विभाजन होने पर क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। स्तंभ कोशिका से शरीर के किसी अंग की कोशिका तैयार हो सकती है। स्टेम सेल थेरेपी अब हार्ट डिसीज में भी कारगर साबित हो रही है।
Published on:
19 Mar 2018 04:29 pm
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