
Stillbirth
Stillbirth : मां बनना सबसे सुखद अहसास होता है। लेकिन कई महिलाएं इस खुशी को नहीं देख पाती हैं। कई बार तो महिलाओं को बड़े दुख के साथ गुजरना पड़ता है जब गर्भ में ही उनका बच्चा मर जाता है या जब मरा हुआ पैदा होता है। जब गर्भावस्था के 20 वें हफ्तें के बाद या लेकिन डिलीवरी से पहले गर्भस्थ शिशु की मृत्यु होना स्टिलबर्थ (StillBirth) कहलाता है।
अकसर लोग स्टिलबर्थ और मिसकैरेज दोनों को एक ही समझ लेते हैं। लेकिन ये दोनों ही अलग अलग होते हैं। जब गर्भावस्था के 20वें हफ्ते के बीच शिशु का मर जाता है तो उसे स्टिलबर्थ कहा जाता है और जब 20वें हफ्ते से पहले गर्भ गिर जाता है तो उसे मिसकैरेज कहा जाता है। हम स्टिलबर्थ को गर्भावस्था के आधार पर तीन तरीके से समझ सकते हैंं अगर 20 से 27वें हफ्ते में गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो जाती है तो इसे शीघ्र या जल्दी स्टिलबर्थ कहते हैं। 28 से 36वें हफ्ते में होने पर इसे लेट स्टिलबर्थ कहा जाता है। वहीं 37वें हफ्ते के बाद ऐसा होने पर इसे टर्म स्टिलबर्थ कहते हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि जब प्रेगनेंट महिला को कोई बीमारी हो या किसी बीमारी का इलाज चल रहा हो तो भी कभी-कभी पेट में बच्चा मर जाता है। कुछ बीमारियों के कारण स्टिल बर्थ का खतरा बढ़ जाता है जैसे — हाई ब्लड प्रेशर, प्रीक्लैंप्सिया (हाई बीपी और सूजन, अक्सर प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में), डायबिटीज, लुपस, थायराइड, कुछ वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन आदि कारणों से यह समस्या हो जाती है। जब महिला अधिक उम्र की हो जाती है तब भी यह समस्या देखने को मिल सकती है।
स्टिलबर्थ होने पर हो सकता है कि आपको शुरुआत में कोई संकेत या लक्षण न दिखाई दें। शरीर में ऐंठन, दर्द या योनि से ब्लीडिंग होने पर तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। इसके अलावा शिशु का मूवमेंट करना बंद कर देना भी खतरनाक है। यदि दो घंटे बीत जाने पर भी शिशु 10 बार मूव नहीं करता है या अचानक से शिशु की मूवमेंट में कमी आ जाती है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
जब आपके पेट में बच्चा मर जाता है तब कुछ हफ्ते बाद ही आपको नैचुरल लेबर पेन शुरू हो जाता और उसके बाद मृत शिशु बाहर आ जाता है।यदि कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो तुरंत प्रसव के विकल्पों पर गौर किया जाता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
24 Aug 2024 04:05 pm
Published on:
24 Aug 2024 01:07 pm
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