
Cancer Drug Price Cut (photo- freepik)
Cancer Drug Price Cut: दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित को ध्यान में रखते हुए कैंसर मरीजों के लिए एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने Zydus Lifesciences को मशहूर कैंसर दवा निवोलुमैब (Nivolumab) का सस्ता बायोसिमिलर बनाने और बेचने की अनुमति दे दी है। यह दवा अमेरिका की कंपनी Bristol Myers Squibb (BMS) की पेटेंटेड दवा Opdiva का विकल्प है, जिसकी कीमत काफी ज्यादा है। जाइडस की दवा करीब 70 प्रतिशत सस्ती बताई जा रही है, जिससे कैंसर के इलाज को आम मरीजों के लिए ज्यादा सुलभ बनाया जा सकेगा।
निवोलुमैब एक लाइफ सेविंग इम्यूनोथेरेपी दवा है, जिसका इस्तेमाल कई तरह के जानलेवा कैंसर के इलाज में किया जाता है। अब तक इसकी ऊंची कीमत की वजह से कई मरीज इसे नहीं ले पाते थे। स्वास्थ्य के नजरिए से देखें तो इस फैसले से हजारों कैंसर मरीजों को बड़ा फायदा मिल सकता है, क्योंकि अब उन्हें कम कीमत पर इलाज का विकल्प मिलेगा।
पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट की एक सिंगल बेंच ने ज़ाइडस की बायोसिमिलर दवा ZRC 3276 को बाजार में उतारने से रोक दिया था। कोर्ट का मानना था कि यह दवा BMS के पेटेंट का उल्लंघन करती है। हालांकि, अब डिवीजन बेंच ने उस फैसले को पलटते हुए जनहित को प्राथमिकता दी है।
जस्टिस सी हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने कहा कि जब मामला जीवन रक्षक दवा का हो, तो अदालत को जनहित के पक्ष में झुकना चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि बीमार लोगों को इलाज से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं होगा, खासकर तब जब पेटेंट की अवधि खत्म होने में सिर्फ चार महीने बचे हों। BMS का पेटेंट 2 मई 2026 को खत्म हो रहा है।
कोर्ट ने यह भी माना कि पेटेंट का संरक्षण जरूरी है, ताकि नई दवाओं के आविष्कार को बढ़ावा मिलता रहे। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर सिर्फ पेटेंट के नाम पर मरीजों को इलाज से दूर रखा जाए, तो यह समाज के लिए नुकसानदेह होगा। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए कोर्ट ने जाइडस को निर्देश दिया है कि वह पेटेंट खत्म होने तक अपनी दवा की बिक्री का पूरा हिसाब रखे।
भारत में कैंसर का इलाज पहले ही आम लोगों की पहुंच से बाहर माना जाता है। इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक दवाएं तो और भी महंगी होती हैं। ऐसे में सस्ती बायोसिमिलर दवाओं की एंट्री से न सिर्फ इलाज का खर्च घटेगा, बल्कि इलाज जल्दी शुरू होने की संभावना भी बढ़ेगी, जिससे मरीजों की जान बच सकती है।
इस फैसले से मरीजों को राहत मिलेगी और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी आर्थिक बोझ कम होगा। साथ ही, कोर्ट ने यह साफ किया है कि जनहित और पेटेंट अधिकार दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। कुल मिलाकर, यह फैसला स्वास्थ्य के लिहाज से एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो मरीजों की जरूरतों को सबसे ऊपर रखता है।
Updated on:
13 Jan 2026, 3:08 PM IST
Published on:
13 Jan 2026, 3:08 PM IST
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