रिसर्च में आया सामने, जूतों से भी फैलता है Coronavirus, पांच दिनों तक रहता है जिंदा

Highlights

-कोराना संक्रमण को रोकने के लिए लोगों से साफ-सफाई व सावधानियां बरतने की अपील की गई

-इस दौरान एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जूतों के माध्यम से भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है।

By: Ruchi Sharma

Published: 29 Mar 2020, 02:04 PM IST

नई दिल्ली. मेडिकल जगत में इन दिनों कोरोना वायरस (Coronavirus) चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है। भारत में कोरोना वायरस से 900 से ज्यादा लोग संक्रमित है, वहीं 25 लोगों की मौत हो गई हो गई है। हर दिन इसकी चपेट में आने वालों के नए नए मामले सामने आ रहे हैं। मारनों वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोराना संक्रमण को रोकने के लिए लोगों से साफ-सफाई, सोशल डिस्टेंसिंग समेत तमाम तरह की सावधानियां बरतने की अपील की गई है। साथ ही लोगों से बाहर न निकलने की अपील भी की गई है। इस दौरान एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जूतों के माध्यम से भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है।


पांच दिन तक जूतों में जिंदा रहता है वायरस

एक रिसर्च स्टडी में यह बात सामने आई है कि जूते का सोल भी बैक्टीरिया, फंगस और वायरस का वाहक बन सकता है। बताया जा रहा है कि जूतों के सोल में भी कोरोना वायरस पांच दिन तक जिंदा रह सकता है। डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस जूते के सोल में पांच दिन तक जिंदा रहता है, खासकर ऐसे जूतों में जो सार्वजनिक व्यस्त क्षेत्रों जैसे सुपर मार्केट, ट्रांसपोर्ट या अस्पतालों जैसी जगहों में पहने गए हों।

कार्डबोर्ड में 24 घंटे जिंदा रहता है

गौरतलब है कि जूते का सोल ड्यूरेबल सिंथेटिक मैटेरियल्स यानी रबर, पीवीसी और लैदर प्लास्टिक वगैरह के बने होते हैं। इन मैटेरियलों में से हवा, द्रव या नमी नहीं गुजर सकती है, इसलिए इनमें बैक्टीरिया या वायरस के रहने की संभावना रहती है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी में भी यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस कार्डबोर्ड में 24 घंटे जिंदा रहता है। हालांकि यह वातावरण के तापमान पर भी निर्भर करता है।

प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील दो से तीन दिनों तक

इस स्टडी के मुताबिक प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील में कोरोना वायरस दो से तीन दिन तक जिंदा रहता है, जबकि जूते में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक मैटेरियल में यह वायरस पांच दिन तक जिंदा रह सकता है। स्टडी के दावे को कंसास सिटी पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट कारोल और अन्य विशेषज्ञों का भी सपोर्ट मिला है। उनका कहना है कि सिंथेटिक मैटेरियल और प्लास्टिक के बने जूते एक्टिव वायरस को जिंदा रख सकते हैं।

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