
कोविड-19: क्या भारत में भी विकसित हो सकती है कोरोना के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी? क्या होता है कम्यूनिटी ट्रांसमिशन?
कोरोना संक्रमण (Sars-Cov-02) से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में अमरीका, ब्राजील और रूस के बाद भारत का नंबर आता है। 31 मई के बाद सरकार की ओर से हुए 'अनलॉक-01' के बाद से लगातार संक्रमण के मामले दिन दूनी रात चौगुने होते जा रहे हैं। बीते 15 दिनों में भारत ने कोरोना मामलें में कई नए रेकॉर्ड बनाए और कई अन्य देशों को पीछे छोड़ा हैं। शुक्रवार को एक ही दिन में अब तक कासबसे बड़ा संक्रमण का आंकड़ा (11,458 नए मामले) सामने आने के बाद अब ''अनलॉक-01' पर पूरे देश में सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों से लेकर राजनीतिक दल और आम आदमी से लेकर कॉर्पोरेट सेक्टर तक सबके मन में यही सवाल कौंध रहा है कि क्या लॉकडाउन हटाने का फैसला सही निर्णय था? क्योंकि जब देश में कोरोना वायरस के मामले दहाई के अंकों में भी नहीं थे तब 24 मार्च की रात को देश में पहला लॉकडाउन लगाया गया लेकिन जब कोरोना संक्रमण के मामलों में एक स्थायी बढ़त बनी हुई थी ऐसे समय में अनलॉक-01 (Unlock-01) की जरुरत थी या नहीं यह बहस का मुद्दा बनता जा रहा है।
हर्ड इम्यूनिटी का इंतजार तो नहीं
बहरहाल, इस बीच रह-रह के दूसरे देशों से तुलना करते हुए यह भी कहा जा रहा है कि क्या यह हर्ड-इम्यूनिटी (Herd Immunity) विकसित करने के लिए तो नहीं किया जा रहा? क्योंकि जब तक 60 फीसदी से ज्यादा आबादी संक्रमित न हो यह भी हो पाना मुमकिन नहीं। ऐसे में तमाम कयासों के बीच अब लोगों के मन में कई सवाल उमडऩे लगे हैं। हर्ड इम्युनिटी क्या होती है? सामुदायिक प्रसारण यानी कम्यूनिटी ट्रांसमिशन (Community Transmission) क्या होता है? यह कैसे फैलता है? क्या भारत में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन है? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो इन दिनों सभी की जुबान पर हैं। हालांकि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन की स्थिति अभी नहीं आई है। तो आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब।
सामुदायिक प्रसार क्या है? (What Is Community Transmission)
किसी भी देश या शहर की आबादी में वायरस जनित रोग का सामुदायिक प्रसार यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्कमें आए बिना ही संक्रमण की चपेट में आ जाए जिसके लक्षण दिखाई न दें या संक्रमित देश या जगह पर जाए बिना ही वायरस से संक्रमित हो जाए तो इसे सामुदायिक प्रसार की श्रेणी में रखते हैं। यह संक्रमण का तीसरा लेकिन सबसे खतरनाक स्तर होता है। इस स्तर पर आबादी के पहुंचने के बाद बड़े पैमाने पर संक्रमण के फैलने की आशंका रहती है।
कैसे फैलता है कम्युनिटी ट्रांसमिशन
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक़ आईसीएमआर के अनुसार कोरोना वायरस परिवार के इस नए सदस्य कोविड-19 (Sars-Cov-02) के फैलने के चार चरण हैं- पहले चरण में वे लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए जो ऐसे देशों से संक्रमित होकर भारत लौटे जहां वायरस पहले से ही मौजूद था। यह स्टेज भारत पार कर चुका है क्योंकि ऐसे लोगों से भारत में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैल चुका है। दूसरे चरण में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलता है। लेकिन ये वे लोग होते हैं जो किसी ना किसी ऐसे संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए जो विदेश यात्रा करके लौटे थे लेकिन खुद कभी इस दौरान विदेश यात्रा पर नहीं गए थे। तीसरा चरण कम्युनिटी ट्रांसमिशन का होता है जिसमें ट्रांसमिशन के प्रकार (Strain) और स्रोत (Source) का पता चलना मुश्किल होता है। महामारी का चौथा चरण भी होता है, जब संक्रमण स्थानीय स्तर पर भी महामारी का रूप ले लेता है।
हर्ड इम्यूनिटी क्या होती है? (What Is Herd Immunity)
अगर कोई संक्रामक या वायरस जनित बीमारी आबादी के बहुत बड़े हिस्से में फैल जाती है और इंसान की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता उस बीमारी के संक्रमण को बढऩे से रोकने में मदद करती है तो जो लोग बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, वो उस बीमारी से 'इम्यून' यानी सुरक्षित हो जाते हैं। इसका मतलब है कि उनमें उक्त वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं। ऐसे लोगों में वायरस का मुक़ाबला करने को लेकर सक्षम एंटी-बॉडीज़ (Anti Bodies) तैयार हो जाता है।
कैसे विकसित होती है हर्ड इम्यूनिटी
वायरस का संक्रमण जितनी तेजी से ज्यादा से ज्यादा आबादी को अपनी चपेट में लगता है उतनी ही जल्दी लोग वायरस के प्रति प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित कर इम्यून होते जाते हैं। इम्यून होने का यह सिलसिला जैसे-जैसे बढ़ता जाता है वैसे-वैसे संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होता जाता है। इससे उन लोगों को भी परोक्ष रूप से सुरक्षा मिल जाती है जो ना तो संक्रमित हुए और ना ही उस बीमारी के लिए 'इम्यून' ही हुए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अगर ज्यादातर लोग वायरस से इम्यून हो जाएं तो आबादी के अन्य समूह या झुंड के बीच मौजूद लोगों तक वायरस का पहुंचना बहुत मुश्किल होता है और एक सीमा के बाद इसका प्रसार रुक जाता है। लेकिन परेशानी सह है कि इस प्रक्रिया में समय लगता है और जबतक आबादी का कम से कम 60 फीसदी हिस्सा संक्रमित न हो ऐसा हो पाना मुश्किल है।
जबकि जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (John Hopkins University) के अनुमान अनुसार हर्ड इम्यूनिटी के स्तर तक पहुंचने के लिए कऱीब 80 फीसदी आबादी के इम्युन होने की ज़रूरत होती है। यानी अगर प्रत्येक पांच में से चार लोग संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद भी संक्रमित नहीं होते हैं तब संक्रमण पर नियंत्रण रखा जा सकता है। हालांकि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि बीमारी कितनी संक्रामक है। पूर्व में खसरा, गलगंड, पोलियो और चिकन पॉक्स जैसी संक्रामक बीमारियों को हर्ड इम्यूुनिटी की मदद से ही हराया जा सका है।
Published on:
15 Jun 2020 06:12 pm
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