BE ALERT : गर्भ में इसकी कमी से नहीं बढ़ती है बच्चों की हाइट

गर्भ में पल रहे बच्चे को ह्यूमन प्लेसेंटा लैक्टोजन (एचपीएल) और इंसुलिन हॉर्मोन मां से मिलता है जो उसके विकास के लिए पर्याप्त होता है। इस स्टेज को फीटल स्टेज कहा जाता है। इस अवस्था में गर्भ में पल रहे भू्रण को इसुंलिन हॉर्मोन नहीं मिल रहा है तो उसकी ग्रोथ पर असर होगा।

By: Ramesh Singh

Published: 25 Aug 2020, 09:28 PM IST

चार भागों में बढ़ती है हाइट
लंबाई यानि हाइट का बढ़ना एक डायनेमिक प्रक्रिया है जो चार चरणों में विभाजित होती है। इसमें पहला स्टेज फीटल, दूसरा इन्फैन्टाइल, तीसरा चाइल्डहुड और चौथा एडोलेसेंट एज होती है। बच्चा जब गर्भ में होता है तब उसे अलग तरह के हॉर्मोन की जरूरत होती है जिसे आईजीएफ-वन और आईजीएफ टू कहा जाता है। ऐसी अवस्था में शिशु को ग्रोथ हॉर्मोन की जरूरत नहीं होती है।

ग्रोथ हार्मोन
इस वजह से जब बच्चे का जन्म हो तो उसकी लंबाई सामान्य बच्चों की लंबाई से कम होगी। दूसरा है इन्फैंट स्टेज जिसमें जन्म के बाद बच्चे में ग्रोथ हॉर्मोन और थॉयराइड हॉर्मोन बनते हैं जिससे उसका शारीरिक विकास बेहतर ढंग से होता है। तीसरा फेज चाइल्डहुड फेज (बचपन) होता है जिसमें थॉयराइड और ग्रोथ हॉर्मोन के साथ न्यूट्रीशियन यानि खानपान से मिलने वाले पोषक तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चौथा फेज होता है किशोरावस्था यानि एडोलेसेंट एज का जिसमें पुरूष और महिला में सेक्स स्टेरॉयड बनते हैं जिससे युवक या युवती की लंबाई तेजी के साथ बढ़ती है। अगर ये सेक्स स्टेरॉयड का सीके्रशन नहीं हो रहा है तो बच्चे के विकास में परेशानी आती है। बच्चे की लंबाई माता-पिता की लंबाई से मिलती जुलती ही होगी, बहुत कुछ असामान्य नहीं हो सकता है।

Ramesh Singh
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned