
Dementia Symptoms (Photo- freepik)
Dementia Symptoms: आज तक डिमेंशिया (Dementia) को पहचानने का सबसे बड़ा संकेत याददाश्त का कमजोर होना माना जाता रहा है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा चौंकाने वाला तथ्य खोजा है, जिससे भविष्य में डिमेंशिया होने का खतरा आंखों की जांच से ही पता चल सकता है। यह नई रिसर्च बताती है कि हमारी आंखों का एक हिस्सा दिमाग की सेहत का आईना हो सकता है।
डिमेंशिया एक गंभीर और धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, रोजमर्रा के काम और यहां तक कि व्यक्तित्व भी बदलने लगता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, अमेरिका में 60 लाख से ज्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं और हर साल एक लाख से अधिक मौतें डिमेंशिया से जुड़ी होती हैं।
Frontiers in Aging Neuroscience नाम की मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, आंखों की रेटिना (Retina) में छिपा है डिमेंशिया का सुराग। रेटिना आंखों के पीछे मौजूद एक बेहद संवेदनशील परत होती है, जो रोशनी को पकड़कर दिमाग तक संदेश पहुंचाती है, ताकि हम चीजों को देख सकें। चीन के वैज्ञानिकों ने करीब 30 हजार वयस्कों पर लगभग 10 साल तक अध्ययन किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि जिन लोगों की रेटिना पतली थी, उनमें आगे चलकर अल्जाइमर जैसी डिमेंशिया की बीमारी होने का खतरा ज्यादा था।
इस अध्ययन में रेटिना की जांच के लिए OCT (ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी) नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया। नतीजों के अनुसार, रेटिना की मोटाई में हर एक यूनिट की कमी से डिमेंशिया का खतरा करीब 3 फीसदी बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, जिन लोगों की आंख के बीच वाले हिस्से की रेटिना ज्यादा पतली थी, उनमें फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (FTD) होने की संभावना 41 फीसदी ज्यादा पाई गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि आंखों की नस (ऑप्टिक नर्व) सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानी ब्रेन से जुड़ी होती है। ऐसे में अगर आंखों की रेटिना कमजोर हो रही है, तो यह दिमाग के धीरे-धीरे कमजोर होने का संकेत भी हो सकता है।
करीब 9 साल बाद जब दोबारा जांच की गई, तो 148 लोगों में अल्जाइमर और 8 लोगों में FTD की पुष्टि हुई। इससे रिसर्च के नतीजों को और मजबूती मिली।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग और NHS के मुताबिक डिमेंशिया में ये लक्षण दिख सकते हैं:
डिमेंशिया को पूरी तरह रोकने का अभी कोई पक्का तरीका नहीं है, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और दिमाग को सक्रिय रखने से इसका खतरा कम किया जा सकता है। साथ ही, आंखों और दिमाग की नियमित जांच भविष्य में बड़ी बीमारी से बचा सकती है।
Published on:
01 Jan 2026 11:27 am
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
