
दर्द ज्यादा हो तो बिस्तर पर लेटकर सिर को बेड से थोड़ा नीचे लटकाएं और जिस हिस्से में दर्द हो उस तरफ की नाक में सरसों के तेल या गाय के घी की तीन-चार बूंदें डालें। सिर दर्द वाले हिस्से में पिपरमिंट तेल की मालिश करें। सिर, माथे और गर्दन पर तौलिया में बर्फ रखकर सिकाई करें। अदरक के भुने टुकड़े मुंह में रखकर चूसें, इससे आराम मिलेगा।
शिरोधारा, शिरोबस्ति व शिरोपिचू कारगर
माइग्रेन के मरीजों को शिरोधारा, शिरोपिचू व नस्य क्रिया कराते हैं। माइग्रेन बहुत पुराना है शिरोवस्ति कराते हैं। नस्य क्रिया के लिए गाय का घी, बादाम तेल का प्रयोग करते हैं। इसके अलावा आयुर्वेदिक तेल भी प्रयोग करते हैं। बीमारी के आधार पर इनका प्रयोग किया जाता है। इसमें इसके अलावा खास जड़ी-बूटी से तैयार काढ़ा और तेल का इस्तेमाल भी किया जाता है। शिरोधार के लिए गुनगुना काढ़ा व तेल माथे के बीचोबीच डाला जाता है। 15 से 20 मिनट की प्रक्रिया से मरीज को राहत मिलती है। इससे पहले शरीर को शुद्ध करने के लिए स्टीम बाथ भी दिया जता है। शिरोधारा के साथ आयुर्वेदिक दवाएं भी लेनी होती है। इससे बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है। इस बात का ध्यान रखें कि दवा किसी विशेषज्ञ की सलाह से ही लें। नेति क्रिया भी कारगर है। सप्ताह में एक बार करना चाहिए।
योग-ध्यान से आराम
माइग्रेन के मरीज को इन योगासनों से आराम मिलता है, इसमें पर्वतासन, हस्तपादासन, बालासन, पश्चिमोत्तासान, पवनमुक्तासन, सेतु बंधासन व सूर्य नमस्कार प्रमुख है। इसके अलावा अनुलोम-विलोम व कपालभाति करें। ये योग आसन 15-30 मिनट नियमित करें। अंत में शवासन या मेडिटेशन करें। ये आसन बिना योग प्रशिक्षक व चिकित्सक की परामर्श के न करें।
एक्सपर्ट : डॉ. गोपश मंगल, आयुर्वेद एवं पंचकर्म विशेषज्ञ, एनआइए जयपुर
Published on:
14 Feb 2020 06:46 pm

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