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अलविदा, कृत्रिम वाल्व! नई तकनीक शरीर के अंदर ही उगाएगी नए वाल्व

लंदन के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में हृदय वाल्व बदलने की सर्जरी को और आसान बना सकती है। इस तकनीक की खास बात ये है कि ये शरीर के अंदर ही नया हृदय वाल्व बनाने का काम करती है।
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लंदन में वैज्ञानिकों ने दिल के इलाज में बड़ी खोज की है। भविष्य में ऐसा इलाज संभव हो सकता है, जहां शरीर के अंदर ही नया दिल का वाल्व बन सकेगा। इससे मरीजों को बार-बार सर्जरी कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इंपीरियल कॉलेज लंदन और हारेफील्ड अस्पताल के शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जो शरीर की प्राकृतिक मरम्मत क्षमता का इस्तेमाल कर जीवित दिल का वाल्व बनाती है।

इस तकनीक में पहले एक खास तरह का जाल शरीर के अंदर डाला जाता है। यह जाल धीरे-धीरे घुल जाता है, लेकिन इस बीच शरीर की कोशिकाएं इस जाल पर इकट्ठी होकर नया ऊतक बनाती हैं। यही नया ऊतक धीरे-धीरे वाल्व का रूप ले लेता है।

अभी दिल के वाल्व बदलने के दो तरीके हैं। पहला तरीका है मशीनी वाल्व लगाना, लेकिन इसके लिए जिंदगी भर खून को पतला करने वाली दवाएं लेनी पड़ती हैं। दूसरा तरीका है जानवरों के ऊतकों से बना वाल्व लगाना, लेकिन ये वाल्व 10-15 साल ही चल पाते हैं। खासकर बच्चों के लिए यह और भी मुश्किल है, क्योंकि उनके शरीर के बढ़ने के साथ वाल्व भी नहीं बढ़ पाता।

नई तकनीक से इन सारी समस्याओं का समाधान हो सकता है। नया वाल्व शरीर के अंदर बनेगा, तो यह शरीर के साथ ही बढ़ेगा और दवाओं की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

अभी इस तकनीक का परीक्षण भेड़ों पर किया गया है और नतीजे काफी उत्साहजनक रहे हैं। अगले पांच साल में इसका इंसानों पर परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है।

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