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First Aid for Fracture: फ्रैक्चर होने पर सबसे पहले क्या करें? मेयो क्लिनिक और अमेरिकन रेड क्रॉस ने बताए फर्स्ट एड उपाय

First Aid for Fracture: अचानक हड्डी टूट (Fracture) जाने पर क्या करना चाहिए? जानिए Mayo Clinic और Red Cross द्वारा बताए गए जरूरी फर्स्ट एड उपाय, जो मरीज की तकलीफ को तुरंत कम कर सकते हैं।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 18, 2026

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सही फर्स्ट एड मिल जाए, तो मरीज की तकलीफ बहुत हद तक कम हो सकती है।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

First Aid for Fracture: हादसा कभी भी बताकर नहीं आता। घर में पैर फिसलने, खेल-कूद के दौरान या किसी रोड एक्सीडेंट की वजह से कई बार हड्डी टूट (Fracture) जाती है। ऐसे समय पर घबराने के बजाय अगर सही फर्स्ट एड (प्राथमिक उपचार) मिल जाए, तो मरीज की तकलीफ बहुत हद तक कम हो सकती है। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) और अमेरिकन रेड क्रॉस (American Red Cross) ने कुछ जरूरी फर्स्ट एड उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप डॉक्टर के पास पहुंचने से पहले मरीज की सही मदद कर सकते हैं।

सबसे पहले पहचानें; क्या वाकई हड्डी टूटी है?

  • चोट वाली जगह पर बहुत तेज दर्द होना और सूजन आ जाना।
  • उस हिस्से का अजीब या टेढ़ा-मेढ़ा दिखना।
  • चोट वाले हिस्से को हिलाने-डुलाने में असमर्थ होना।
  • कभी-कभी हड्डी का चमड़ी को फाड़कर बाहर आ जाना या वहां से खून बहना।

1. बहते हुए खून को रोकें (अगर घाव खुला है)

अगर हड्डी टूटने के साथ-साथ वहां घाव हो गया है और खून बह रहा है, तो सबसे पहले एक साफ कपड़ा या पट्टी लें। घाव पर सीधा हल्का दबाव (Direct Pressure) बनाकर खून को रोकने की कोशिश करें। ध्यान रखें कि हड्डी वाले हिस्से को ज्यादा जोर से न दबाएं।

2. चोट वाले हिस्से को बिल्कुल न हिलाएं (Immobilize)

सबसे जरूरी नियम यही है कि टूटी हुई हड्डी या उस अंग को सीधा करने या हिलाने की कोशिश बिल्कुल न करें। अगर आप उसे हिलाएंगे, तो नसों और मांसपेशियों को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। मरीज को आराम से एक जगह बिठाएं या लिटाएं और उस अंग को सहारा (Support) दें।

3. बर्फ से सिकाई करें (Ice Pack)

सूजन और दर्द को कम करने के लिए चोट वाली जगह पर बर्फ लगाएं। लेकिन याद रखें, बर्फ को सीधे चमड़ी पर नहीं रगड़ना है। बर्फ को किसी साफ और पतले तौलिये या कपड़े में लपेटकर ही 15 से 20 मिनट के लिए सिकाई करें।

4. मरीज को सदमे (Shock) से बचाएं

गंभीर चोट लगने पर कई बार मरीज सदमे में चला जाता है, जिससे उसे चक्कर आना, कमजोरी लगना या सांस तेज होना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे में मरीज को सीधा लिटा दें और संभव हो तो उसके पैरों को थोड़ा ऊपर उठा दें (बशर्ते पैर में फ्रैक्चर न हो)। मरीज को कंबल या चादर ओढ़ाकर गर्म रखें और हिम्मत बंधाएं।

5. डॉक्टर या एम्बुलेंस को तुरंत कॉल करें

अगर चोट सिर, गर्दन, पीठ या जांघ (Thigh) पर लगी है, या मरीज हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं है, तो तुरंत एम्बुलेंस को फोन करें। अगर स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं है, तो किसी की मदद से मरीज को सुरक्षित तरीके से नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर के पास ले जाएं।

भूलकर भी न करें ये गलतियां!

टूटी हुई या खिसकी हुई हड्डी को खुद से दबाकर या खींचकर ठीक करने की कोशिश कभी न करें। यह काम सिर्फ डॉक्टरों को ही करने दें। दर्द बहुत तेज होने पर भी अपनी मर्जी से कोई भी पेनकिलर दवा न खाएं या न दें। चोट वाली जगह पर किसी भी तरह के तेल या बाम से मालिश बिल्कुल न करें, इससे अंदरूनी ब्लीडिंग बढ़ सकती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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