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हिस्टीरिया में मरीज के जबड़े अपने आप भिंचते, ज्यादा तनाव है वजह

तनाव बढ़ने पर दिमाग को सुरक्षा देने वाला रक्षा तंत्र एक्टिव हो जाता है। ऐसे में तनाव का असर दिमाग पर न होकर शरीर पर दिखने लगते हैं। इसे ही हिस्टीरिया (जबड़ा भिंचना) कहते हैं। इसे लोग देवी कोप या मिर्गी मानते हैं जो सही नहीं है। यह एक प्रकार की मानसिक बीमारी है। काउंसलिंग व इलाज से ठीक हो जाती है। यह 10-35 वर्ष उम्र के लोगों की बीमारी है जो तनाव होने पर नियंत्रण खो देते हैं।

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महिलाओं में हिस्टीरिया इसलिए अधिक
हिस्टीरिया महिला-पुरुष दोनों की बीमारी है लेकिन महिलाओं में खासकर नव विवाहिताओं में अधिक दिखती है। पुरुष घर से बाहर जाकर अपने तनाव को कम कर लेता है वहीं महिलाएं तनाव में घुटती रहती हैं। हिस्टीरिया उन लड़कियों में अधिक देखने में आता है जिन्हें विवाह के बाद किसी भी कारण से अत्यधिक तनाव झेलना पड़ता है। परीक्षा के दौरान छात्रों में भी यह परेशानी बढ़ जाती है।

मिर्गी से अलग बीमारी है
मिर्गी के झटके कभी और कहीं भी आ जाते हैं। पहले से आभास नहीं होता है। मिर्गी में दांत भिंचते तो होंठ और जीभ कटते हैं लेकिन हिस्टीरिया में दौरे का पहले से आभास होता है। झटके सार्वजनिक स्थानों पर आते हैं। इसमें मरीज को चोटें नहीं आती हैं।

टेस्ट नेगेटिव तो हिस्टीरिया
आमतौर जब किसी को इसके लक्षण दिखते हैं तो उसकी कई जांचें होती हैं ताकि मिर्गी या ब्रेन डिजीज तो नहीं है। जांच रिपोर्ट सामान्य होने पर ही हिस्टीरिया मानते हैं। इसके अलावा कई थैरेपी से मरीज में तनाव का आकलन भी करते हैं।
दांतों का भिंचना है लक्षण
अचानक दांतों का भिंचना, हंसना, बेहोशी, झटके व लकवा होना, सीने, सिर, मांसपेशियों व पेट में दर्द, उल्टी, ऐंठन, हिचकी आना और जोर-जोर से चिल्लाना आदि प्रमुख लक्षण हैं।

मरीज और परिजन इन बातों का रखें ध्यान
मरीज बेहोश है तो मुंह में चम्मच आदि न डालें। दांत टूट सकते हैं। मरीज को हवादार जगह पर लिटा कपड़े ढीले कर दें। पैर छह इंच ऊपर कर दें ताकि ब्लड फ्लो सही रहे। हो सके तो हाथ-पैरों की मालिश करें। मरीज के चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारने से होश आता है। मरीज को पर्याप्त नींद लेने दें। ताड़ासन, भुजंगासन, सिंहासन और प्राणायाम (सुदर्शन क्रिया) आदि योग से लाभ मिलता है।

कारण
तनाव मुख्य कारण है। अपनी फीलिंग न बता पाना, सदमा, हदसा, शादी में देरी, दांपत्य जीवन में परेशानी, संतानहीनता, अनियमित पीरियड्स और घुटन का माहौल, आर्थिक कारण आदि।
सहानुभूति से आराम
रोग के लक्षण दिखने पर जल्द डॉक्टर को दिखाने से मरीज को प्राइमरी और सेकंड्री गेन होता है। पहला, मरीज की डॉक्टर से काउंसलिंग हो जाती है। दूसरा, परिजनों से सहानुभूति मिलने पर तनाव घटने से सेहत सुधरती है।
आयुर्वेद भी कारगर
नाक में पुराना घी डालें। शरीर पर घी से मालिश करें। पंचगव्य, वात कुलांतक रस, संगेयासव पिष्ठी, मोती पिष्टी, ब्रह्म रसायन, ब्राह्मी, शंखपुष्पी से भी लाभ होता है।
डॉ सुशील खेराड़, विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर
डॉ. लीलाधर शर्मा, आयुर्वेद चिकित्सक अधिकारी, गुसांईसर, चूरू