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जानिए, भारत में कैसे होता हा कोरोना वायरस का टेस्ट, 600-700 तक होता है परीक्षण

Highlights- देश में कोरोना (Corona) के केस बढ़कर हुए 415 हो गए है-मरने वालों की संख्या सात हो गई है-हर देश कोरोना वायरस के इलाज का पता लगाने में लगा

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Ruchi Sharma

Mar 23, 2020

How Indian Testing Labs Check Covid-19 Victim?

जानिए, भारत में कैसे होता हा कोरोना वायरस का टेस्ट, 600-700 तक होता है परीक्षण

नई दिल्ली. कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है। देश में कोरोना के केस बढ़कर हुए 415 हो गए है। वहीं मरने वालों की संख्या सात हो गई है। हर देश कोरोना वायरस के इलाज का पता लगाने में लगा है। क्या आप जानते है भारत में कोरोना वायरस (Covid-19 Testing Labs) के परीक्षण के प्रोसेस क्या होते है। इस प्रोसेस में कितना समय लगता है।

बता दें कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कहा है कि नामित प्रयोगशालाएं पारंपरिक रियल-टाइम पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) का उपयोग करेंगी, जो गले के पीछे से एकत्र किए गए स्वाब पर आयोजित किया जाता है। निचले श्वसन पथ से एक तरल नमूना या एक साधारण लार का नमूना। इस तरह के परीक्षणों को आमतौर पर इन्फ्लुएंजा ए, इन्फ्लुएंजा बी और एच 1 एन 1 वायरस का पता लगाने में उपयोग किया जाता है।

जानिए, क्या है पीसीआर टेस्ट

जानकारी के मुताबिक कोरोना के संदिग्ध मरीजों का सबसे पहले पालीमर चेन रिएक्शन टेस्ट (पीसीआर) कराया जाता है। यह एक ऐसी तकनीक है जो डीएनए के एक खंड की प्रतियां बनाता है। पॉलिमरेज़ उन एंजाइमों को संदर्भित करता है जो डीएनए की प्रतियां बनाते हैं। चेन रिएक्शन यानी डीएनए के टुकड़े कैसे कॉपी किए जाते हैं, एक को दो में कॉपी किया जाता है, दो को चार में कॉपी किया जाता है। पीसीआर तकनीक का आविष्कार करने वाले अमेरिकी बायोकेमिस्ट केरी मुलिस को 1993 में रसायन विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. आरआर गंगाखेडकर ने बताया कि पीसीआर को नमूनों को परीक्षण करने में 4.5 से 6 घंटे तक का समय लगता है।हालांकि, कुल मिलाकर सैंपल कलेक्ट करने और रिपोर्ट मिलने तक 24 घंटे के आसपास का समय लगता है।

भारत में प्रतिदिन 10,000 नमूनों का परीक्षण करने की क्षमता है, और वर्तमान में 600-700 के आसपास परीक्षण हो रहा है। तुलनात्मक रूप से, दक्षिण कोरिया में कथित तौर पर प्रतिदिन 20,000 नमूनों का परीक्षण किया जा रहा है। यदि आप ट्रांसमिशन को लोकल लेवल पर देखेंगे तो हम पर्याप्त परीक्षण कर रहे हैं। लेकिन यदि आप इसे समुदाय-आधारित संचरण के हिसाब से देखेंगे तो ये एक अलग मुद्दा है। अभी भी कोई सबूत नहीं है जहां हमें पता नहीं है कि सूचकांक मामले ने इस संक्रमण को कैसे हासिल किया है।