Kids Mental Health: बच्चों को रसोई-बागवानी से जोड़ें, कहानियां भी सुनाएं

लॉकडाउन के बाद से बच्चों के जीवन में कई तरह के बदलाव हुए हैं। पहले वे स्कूल जाते थे। आधा समय पढ़ते और आधा समय सोशलाइजेशन व खेलकूद का होता था।

By: Hemant Pandey

Published: 19 Jul 2020, 07:53 PM IST

लॉकडाउन के बाद से बच्चों के जीवन में कई तरह के बदलाव हुए हैं। पहले वे स्कूल जाते थे। आधा समय पढ़ते और आधा समय सोशलाइजेशन व खेलकूद का होता था। जो उनके संपूर्ण विकास के लिए जरूरी था। अब घर में ही पढ़ाई और मनोरंजन हो रहा है। वह भी मोबाइल, कम्प्यूटर व टीवी स्क्रीन तक सिमट गया है। इससे मेंटल हैल्थ प्रभावित हो रहा है। तनाव, गुस्सा, चिड़चिड़ापना, अवसाद, तुलना, बातें न मानना आदि लक्षण देखने को मिल रहे । जानते हैं क्या करें-
बच्चों से करें दोस्ती
सबसे पहले बच्चों से दोस्ती करें। उन्हें लगे कि आप जो कहते हैं उसमें उनका ही भला होने वाला है। इसके लिए समय दें। मस्ती करें। उनके साथ लूडो, कैरम, पजल्स, चेस आदि खेलें। अगर घर में थोड़ा स्पेस है तो बैडमिंटन या क्रिकेट खेल सकते हैं।
ग्रैंड पैरेंट्स कहानियां सुनाएं
पहले बच्चे ग्रैंड पैरेंट्स के साथ ज्यादा समय बिताते थे। कहानियां सुनते थे। इसके लिए प्रेरित करें। इससे बच्चे स्क्रीन से दूर रहेंगे, अच्छी कहानियां सुनेंगे तो उनमें अच्छे संस्कार भी आएंगे। बुजुर्ग के लिए भी अच्छा है।
दूसरे कार्यों से ऐसे जोड़ें
बच्चे से घर के कामों में मदद लें जैसे किसी दिन पौधों को पानी देना या फिर किचन में पैरेंट्स की मदद करवाना आदि। घर की सफाई में मदद लें। उन्हें मोटिवेट करें। उन्हें भी लगे कि घर में उनकी जरूरत है। वे भी भागीदारी कर सकते हैं। उनका भी महत्व है।
कम करें स्क्रीन टाइम
स्क्रीन टाइम कम कराएं। बच्चों को सीधे यह न कहें कि वे मोबाइल या टीवी न देखें। इससे उनका गुस्सा और बढ़ जाएगा क्योंकि उनको लगेगा कि फिर से पाबंदी का कोई नया नियम आ गया है। इसलिए उनका ध्यान दूसरी तरफ खींचने की कोशिश करें।
बच्चों के टैलेंट को आगे बढ़ाएं
बच्चों को घर के दूसरे कामों की तरफ आकर्षिक करने की कोशिश करें ताकि उनको मजा आए। वे मोबाइल-टीवी छोडक़र वह काम करें। इसके लिए बच्चे की खूबियों को बाहर निकालें। जैसे किसी को डांस तो किसी को पेंटिंग, राइटिंग या म्यूजिक पसंद है। उसके लिए मोटिवेट करें। इसके लिए जरूरी है उनका रुटीन बना लें और उसको पूरा करें। नई-नई चीजें सिखाने की कोशिश करें। वे व्यस्त रहेंगे। उनके कार्यों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं। उन्हें अच्छा लगेगा। अगर बच्चा किसी काम के लिए जिद करता है तो डांटें बिल्कुल नहीं, प्यार से समझाएं।
डॉ. रेनू शर्मा, बाल मनोवैज्ञानिक, एम्स, नई दिल्ली

Hemant Pandey
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned