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बच्चे खेलेंगे-कूदेंगे तो बाद में दिल की बीमारियों से रहेंगे दूर

नया अध्ययन : युवावस्था तक ज्यादातर समय गतिहीन रहना हृदय के लिए ठीक नहीं, स्मार्टवॉच के जरिए निष्क्रियता और बीमारियों का विश्लेषण

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बच्चे खेलेंगे-कूदेंगे तो बाद में दिल की बीमारियों से रहेंगे दूर

बच्चे खेलेंगे-कूदेंगे तो बाद में दिल की बीमारियों से रहेंगे दूर

वॉशिंगटन. बचपन स्वस्थ जीवन का आधार है। आगे जिंदगी कितनी स्वस्थ होगी, इसका अंदाजा बचपन की सेहत के आधार पर काफी हद तक लगाया जा सकता है। ईएससी कांग्रेस 2023 में पेश अध्ययन के मुताबिक बचपन की निष्क्रियता बाद में दिल के दौरे का खतरा बढ़ा सकती है। सामान्य वजन और रक्तचाप वाले लोगों के अध्ययन में पाया गया कि बचपन से युवावस्था तक ज्यादातर समय गतिहीन रहना हृदय को क्षति पहुंचाता है।

अध्ययन के लेखक यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्टर्न फिनलैंड, कुओपियो के विशेषज्ञ डॉ. एंड्रयू अगबाजे ने कहा, स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से युवा लोगों का दिल इसलिए भी भारी हो जाता है कि उन्होंने बचपन में दौडऩे-भागने जैसी गतिविधियों को कम समय दिया। बच्चों और किशोरों को दीर्घकालीन स्वास्थ्य लिए हमेशा ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रहने की जरूरत है। यह अपने किस्म का पहला अध्ययन है, जिसमें स्मार्टवॉच के जरिए युवा लोगों के बचपन के गतिहीन समय और उनकी हृदय संबंधी बीमारियों का विश्लेषण किया गया।

हर तरह से आगे बढ़ते रहने की जरूरत

अध्ययन में सुझाव दिया गया कि माता-पिता को बच्चों और किशोरों को टहलने के लिए नियमित बाहर ले जाना चाहिए। सोशल मीडिया और वीडियो गेम पर समय बिताने को सीमित कर उन्हें ज्यादा से ज्यादा घूमने-फिरने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जैसा कि मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने कहा था, अगर आप उड़ नहीं सकते, तो दौड़ें। दौड़ नहीं सकते, तो चलें। चल नहीं सकते, तो रेंगें। लेकिन हर तरह से आगे बढ़ते रहे।

ये हैं जोखिम के पांच कारक

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों में बढ़ा हुआ बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ), रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और कम उम्र में धूम्रपान की आदत, ये पांच ऐसे कारक हैं, जो 40 की उम्र तक हृदय संबंधी गंभीर रोगों के अलावा स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकते हैं।