
IIT-K professor dies of cardiac arrest, collapses while giving speech
आईआईटी-कानपुर के डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रोफेसर समीर खंडेकर का निधन हो गया है। दुख की बात यह है कि उनका निधन एक पूर्व छात्र सम्मेलन में मंच पर भाषण देते हुए हुआ, जो दिल से जुड़े विषय पर था।
53 वर्षीय खंडेकर के अंतिम शब्द बताये जाते हैं, "अपनी सेहत का ध्यान रखें...", जिसके बाद वे मंच पर ही गिर पड़े।
उन्हें आनन-फानन लक्ष्मीपत सिंघानिया इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी ले जाया गया, जहां उन्हें "डेड अपॉन अराइवल" घोषित कर दिया गया।
आईआईटी-के सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर 2019 से ही दिल की समस्याओं से जूझ रहे थे।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नीरज कुमार ने कहा कि जब तक मरीज़ को अस्पताल लाया गया, तब तक वह पहले ही दम तोड़ चुके थे। उन्होंने आगे कहा, "उनकी मृत्यु दिल के दौरे या दिल के ब्लॉक से हुई है।"
आईआईटी-कानपुर के निदेशक प्रोफेसर एस. गणेश ने सोशल मीडिया पर इस दुखद खबर को साझा करते हुए कहा कि संस्थान "एक विनम्र आत्मा के खोने का शोक मना रहा है।"
प्रोफेसर खंडेकर अपने माता-पिता, पत्नी प्रादन्या और एक बेटे को पीछे छोड़ गए हैं। उनका पार्थिव शरीर संस्थान के स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया है और अंतिम संस्कार उनके बेटे के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से आने के बाद होगा।
दिल का अचानक रुकना - लक्षणों को पहचानो और जोखिम कम करो!
दिल हमारे शरीर का इंजन है, रात-दिन बिना रुके खून पंप करके हमें जिंदा रखता है। पर कभी-कभी ये इंजन अचानक रुक भी सकता है। इसे ही कार्डियक अरेस्ट कहते हैं, जो बेहद गंभीर और जानलेवा स्थिति है। अगर समय पर मदद न मिली तो मरीज की जान भी जा सकती है।
तो आइए समझते हैं कि दिल का अचानक रुकना किन लक्षणों से पहचाना जा सकता है और कैसे हम अपने जोखिम को कम कर सकते हैं।
लक्षणों पर नजर रखें:
तेज सांस लेने में तकलीफ: लगातार तेज सांस लेना या हांफना महसूस होना, जिसे ठीक करना मुश्किल हो।
सीने में दर्द: छाती के बीचो-बीच तेज या दबाने वाला दर्द होना, जो हाथ, गर्दन या जबड़े तक भी फैल सकता है।
बेचैनी और घबराहट: बिना किसी कारण के अचानक बेचैनी और घबराहट महसूस होना।
चक्कर आना या बेहोशी: कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना या बेहोश होकर गिर जाना।
त्वचा का रंग बदलना: चेहरे और होठों का नीला पड़ जाना या पसीना छूटना।
ध्यान रखें, सभी को ये सभी लक्षण नहीं दिखेंगे! ये लक्षण कुछ मिनटों के लिए ही हो सकते हैं या फिर धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं। अगर किसी में दो या अधिक लक्षण दिखाई दें और तुरंत सुधार न हों, तो बिना देरी के डॉक्टर से संपर्क करें या एम्बुलेंस बुलाएं।
जोखिम कम करने के उपाय:
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव कम करने के तरीके अपनाएं।
कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करें: उच्च कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर, दिल के दौरे और कार्डियक अरेस्ट के बड़े कारण हैं। इन्हें डॉक्टर के मार्गदर्शन में नियंत्रित करें।
धूम्रपान और शराब का सेवन बंद करें: धूम्रपान और शराब का सेवन हृदय के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इन्हें पूरी तरह से त्याग दें।
नियमित चेकअप कराएं: डॉक्टर से नियमित जांच करवाएं और समय रहते किसी भी हृदय रोग का पता लगाएं।
याद रखें, दिल की सेहत हमारे हाथ में है। सतर्क रहें, लक्षणों को पहचानें और स्वस्थ आदतें अपनाकर कार्डियक अरेस्ट के जोखिम को कम करें। यह हमारा और हमारे प्रियजनों का कर्तव्य है।
अतिरिक्त जानकारी:
- कार्डियक अरेस्ट दिल के दौरे से अलग है। दिल का दौरा रक्त प्रवाह में रुकावट के कारण होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युत प्रणाली में गड़बड़ी होती है।
- समय पर सीपीआर (CPR) देने से कार्डियक अरेस्ट में मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है। सीपीआर सीखना सभी के लिए बेहद जरूरी है।
(आईएएनएस)
Published on:
24 Dec 2023 10:01 am
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