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Immunology Study : शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली गर्भावस्था के दौरान बीमारी का पता लगा सकती है

Immunology Study : प्रेगनेंसी की बात करें तो ये शुरू से ही महिलाओं के लिए बहुत ही ज्यादा चुनौती भरा होता है, इसलिए माना जाता है कि प्रेगनेंसी के दौरान व्यक्ति कि प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होनी चाहिए।

नई दिल्ली

Updated: December 29, 2021 03:03:58 pm

नई दिल्ली। Immunology Study : प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत होना इसलिए आवश्यक होता है क्योंकि ये माँ और उसके बच्चे को संक्रमण से बचा के रखने में सहायक होता है, प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे दोनों को बीमारियों से बचा के रखने के लिए आपको अपनी प्रतिरक्षा मजबूत बना के रखने कि जरूरत होती है, वहीं आपको बताते चलें कि एनटीएनयू के सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर इंफ्लेमेशन रिसर्च (सीईएमआईआर) में एक शोध समूह गर्भावस्था में सूजन का अध्ययन करने में लगा हुआ है। समूह ने निष्कर्ष निकाले हैं जो इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि गर्भावस्था के दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे व्यवहार करती है।
Immunology Study : शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली गर्भावस्था के दौरान बीमारी का पता लगा सकती है
Immunology Study
वहीं एक रिसर्च भी की गई है जिसमें लगभग 700 महिलाओं का टेस्ट किया गया है, इसमें शोधकर्ताओं ने ये पाया है कि बच्चे के जन्म के दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली में कैसे-कैसे बदलाव आता है, वहीं हर तीन महीने में इसपर तेजी के साथ बदलाव को भी देखा गया है।
जरमुंड का मानना है कि सामान्य प्रेगनेंसी में प्रतिरक्षा प्रणाली के व्यवहार का अध्ययन करना बहुत उपयोगी हो सकता है। जरमुंड ने कहा, "हमारा रिसर्च गर्भावस्था के दौरान अलग-अलग चरणों में सामान्य होने के संदर्भ के रूप में काम कर सकता है। हमारे सर्वेक्षण के साथ प्रेग्नेंट महिला के रक्त के नमूनों के विश्लेषण की तुलना करके, हम असामान्यताओं का बहुत जल्दी पता लगा सकते हैं। जल्दी पता लगाने से डॉक्टर को यह आकलन करने में मदद मिल सकती है कि क्या महिला में बीमारी विकसित होने का खतरा बढ़ गया है और उसे अतिरिक्त अनुवर्ती कार्रवाई की आवश्यकता है।"
इवर्सन कहते हैं कि एक बार जब हम गर्भावस्था की विभिन्न जटिलताओं की विशेषता वाले परिवर्तनों की मैपिंग कर लेते हैं, तो यह हमें दिखाएगा कि रोग के विकास का जल्द से जल्द पता लगाने के लिए हमें किन असामान्यताओं की तलाश करनी चाहिए। इस संवेदनशील विधि के होने से हम उच्च जोखिम वाले गर्भधारण को इंगित करने में सक्षम होंगे ताकि हम मां और भ्रूण का अधिक बारीकी से पालन कर सकें। यही हमारा लक्ष्य है।
क्लिनिकल एंड मॉलिक्यूलर मेडिसिन विभाग के शोध समूह को अभी तक यह नहीं पता है कि प्रत्येक व्यक्ति की बीमारी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में एक अद्वितीय "फिंगरप्रिंट" उत्पन्न करती है या नहीं। अब तक, विश्लेषणों ने प्रारंभिक गर्भावस्था में पीसीओएस और गर्भकालीन उच्च रक्तचाप (उच्च रक्तचाप) के लिए एक असामान्य साइटोकिन प्रोफाइल का खुलासा किया है।

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