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कोविड-19: वैक्सीन से नहीं ‘युवाओं’ के दम पर जीतेगा भारत कोरोना से जंग

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत की आबादी को देखते हुए वैक्सीन से ज्यादा 'हर्ड इम्युनिटी' पर ध्यान देने की जरुरत है। भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा युवाओं का है जिनकी 'प्रतिरक्षा क्षमता' के बल पर भारत कोरोना से यह लड़ाई जीत सकता है।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Jun 15, 2020

कोविड-19: वैक्सीन से नहीं 'युवाओं' के दम पर जीतेगा भारत कोरोना से जंग

कोविड-19: वैक्सीन से नहीं 'युवाओं' के दम पर जीतेगा भारत कोरोना से जंग

कोरोना संक्रमण का मुकाबला करने के लिए जहां दुनिया के अन्य देश वैक्सीन (Corona Vaccine) बनाने पर जोर दे रहे हैं वहीं कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि चीन, भारत और रूस जैसे देशों को हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) विकसित करने पर जोर देना चाहिए। वैक्सीन बनने में अभी एक साल का समय है लेकिन तब तक कोरोना संक्रमण दुनिया भर में लाखों लोगों की जान ले चुका होगा। वर्तमान में पूरी दुनिया में 8,024,914 कोरोना संक्रमण की चपेट में हैं जबकि 436,218 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में जिस तेजी से कोरोना संक्रमण के रोगी बढ़ रहे हैं उससे यह अंदेशा होने लगा है कि कहीं सरकार हर्ड इम्यूनिटी विकसित होने का इंतजार तो नहीं कर रही है? कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि भारत के संदर्भ में ऐसा होना संभव है। ऐसे में लॉकडाउन खत्म करने और देशभर में प्रतिबंध खत्म करने के पीछे कहीं यही वजह तो नहीं। क्योंकि जब तक 60 फीसदी से ज्यादा आबादी संक्रमित न हो यह भी हो पाना मुमकिन नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) जहां घर रहने, मास्क पहनने और फिजिकल डिस्टेंसिंग (Physical Distancing) को ही कोरोना का फिलहाल सबसे कारगर तरीका मान रहा है वहीं वैज्ञानिकोंका एक समूह हर्ड इम्यूनिटी बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है।

हमेशा रहने वाला है कोरोना
हर्ड इम्यूनिटी पर ध्यान केन्द्रित करने का मंत्र देने वाले वैज्ञानिकों के इस समूह का कहना है कि कोरोना परिावार में 200 के करीब वायरस हैं। कोविड-19 बिल्कुल नए प्रकार का सदस्य है जिसके अब तक 11 रूप (Corona Strain) हमारे सामने आ चुके हैं। ऐसे में ज्यादातर वैज्ञानिक यही मानते हैं कि आने वाले सालों में भी कोरोना वायरस संक्रमण हमारे बीच ही रहने वाला है। ऐसे में सोशल-फिजिकल डिस्टेंसिंग, लॉकडाउन और मास्क पहनकर इससे बहुत दिनों तक बचे रह पाना मुश्किल है। कोरोना महामरी के चलते दुनिया भर में छाया आर्थिक संकट कहीं वायरस से पहले भुखमरी और संसाधनों की कमी से लोगों की जान न ले ले।

हर्ड इम्यूनिटी क्या होती है?
अगर कोई संक्रामक या वायरस जनित बीमारी आबादी के बहुत बड़े हिस्से में फैल जाती है और इंसान की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता उस बीमारी के संक्रमण को बढऩे से रोकने में मदद करती है तो जो लोग बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, वो उस बीमारी से 'इम्यून' यानी सुरक्षित हो जाते हैं। इसका मतलब है कि उनमें उक्त वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं। ऐसे लोगों में वायरस का मुक़ाबला करने को लेकर सक्षम एंटी-बॉडीज़ तैयार हो जाता है।

भारत में मुमकिन है यह उपाय
हर्ड इम्यूनिटी और भारत की संभावनाओं पर रोशनी डालते हुए अमरीका की वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर डिज़ीज़ डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी के डायरेक्टर और अमरीका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के सीनियर रिसर्च स्कॉलर डॉक्टर रामानन लक्ष्मीनारायण ने बताया कि भारत युवाओं का देश है। यहां की आबादी में युवाआं की संख्या ज्यादा है जिनका इस लड़ाईमें महत्त्वपूर्ण योगदान हो सकता है। लक्ष्मीनारायण का मानना है कि लॉकडाउन को बढ़ाने और किसी वैक्सीन के बनने का इंतजार करने से बेहतर है कि हम हर्ड इम्यूनिटी पर ध्यान लगाएं। उन्होंने कहा कि अगर भारत की 65 फीसदी आबादी कोरोना वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो जाए, भले ही संक्रमण के दौरान उनमें हल्के या ना के बराबर लक्षण हों तो बाकी की 35 प्रतिशत आबादी को भी कोविड-19 से सुरक्षा मिल जाएगी। ऐसे मेंएक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बुजुर्गों और क्रॉनिकल डिजीज जैसे हार्ट पेशेंट्स, डज्ञयबिटीज और टीबी के मरीजों की जान जोखिम में डाले बिना यह सब संभव हो सकता है?

युवाओं संग जीतेंगे कोरोना से जंग
डॉ. लक्ष्मीनारायण का कहना है कि देश की जनसांख्यिकी (Corona Demography) इस मुकाबले में बेहद महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भारत में 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है और केवल 6 प्रतिशत लोगों की आयु 65 वर्ष से अधिक है। जब की इटली में 22 प्रतिशत और चीन में 10 प्रतिशत लोग 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के है। वहीं बुजुर्गों की तुलना में युवाओं में संक्रमण के ज्यादातर मामलों में या तो मामूली लक्षण हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहे। अगर युवाओं की इस ताकत को सीमित और नियंत्रित तरीके से कोरोना वायरस के संपर्क (Expose) में लाया जाए तो अस्पतालों को शायद गंभीर लक्षणों वाले मरीज़ों का उतना बोझ ना झेलना पड़े। लेकिन ऐसा करने के लिए देश में टेस्टिंग की क्षमता को बढ़ाना होगा, ताकि जिन समूहों में कोविड-19 को सीमित रखना चाहते हैं, वहां तीव्र गति से संक्रमण का पता लगाया जा सके और जिनको स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत हो, उन्हें जल्द से जल्द ये सेवाएं दी जा सकें। मास्क पहनना, फिजिकल डिस्टेन्सिंग और घर-बाहर हर जगह साफ-सफाई का पालन करना होगा। इसके अलावा एंटी-बॉडीज़ टेस्टिंग (Anti Bodies Testing) भी ज़रूरी है ताकि उन लोगों का पता लगाया जा सके जिनमें कोविड-19 से लडऩे वाली एंटीबॉडी विकसित हो चुकी हैं। इस तरह हर्ड-इम्यूनिटी के बल पर भारत इस लड़ाई में कोरोना को हरा सकता है।

भारत में खास ख़ास
-कोविड-19 की रिकवरी दर 50.60% से बेहतर होकर 51.08% हुआ।
- पिछले 24 घंटे में 1.15+ लाख नमूनों की जांच की गई। अब कुल परीक्षणों की संख्या 57.74+ लाख पार: आईसीएमआर
-कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए राज्यों/राज्य संघ क्षेत्रों को रेलवे 5,231 कोविड केयर सेंटर प्रदान करेगी।