देसी कोरोना वैक्सीन: 2021 तक भारत के पास अपनी 'अप्रूव्ड' वैक्सीन होगी

कोरोना वायरस के निर्माण में भारत में सबसे आगे चल रही सीरमइंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अडर पूनावाला का कहना है कि भारत में वैक्सीन का काम धीरे जरूर है लेकिन यह जब भी पूरा होगा पूरी तरह से सार्वजनिक डपयोग के लिए सुरक्षित होगा

By: Mohmad Imran

Published: 03 Sep 2020, 01:01 PM IST

दुनियाभर में जहां 120 से ज्यादा कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) परीक्षण पर काम चल रहा है वहीं भारत में भी वैक्सीन देने के लिए कंपनियां दिनरात प्रयास कर रही हैं। स्वदेशी कंपनियों में कोरोना वैक्सीन बनाने में सबसे आगे चल रही पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Cerum Institute of India) का कहना है कि भारत में अप्रेल 2021 के शुरुआत में एक 'अप्रूव्ड' कोरोना वैक्सीन (Approved Corona Vaccine) होगी जो पूरी तरह से सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित होगी। गौरतलब है कि सीरम इंस्टीट्यूट वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी (Worlds Largest Vaccine Manufacturers By Volume) है। वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल (Wall Street Journal) की शीर्ष रिसर्च और ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन रिसर्च (Bernstein Research) ने 27 अगस्त को प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कोरोना की सबसे सुरक्षित वैक्सीन बनाने के बेहद करीब है।

देसी कोरोना वैक्सीन: 2021 तक भारत के पास अपनी 'अप्रूव्ड' कोरोना वैक्सीन होगी

4 कंपनियां वैक्सीन दौड़ में सबसे आगे
विश्व स्तर पर चार उम्मीदवार कंपनियां ऐसी हें जो 2020 के अंत तक या 2021 के शुरुआती कुछ महीनों में एक सुरक्षित अनुमोदित (अप्रूव्ड) और सार्वजनिक उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार वैक्सीन देने की दौड़ में सबसे आगे हैं। वहीं भागीदारी के माध्यम से भारत में भी दो कंपनियां ऑक्सफोर्ड का वायरल वेक्टर वैक्सीन और नोवावैक्स की प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन पर तेजी से काम कर रही हैं। बर्नस्टीन रिपोर्ट में स्पष्ट तौर से कहा गया है कि इन दोनों वैक्सीन की मौजूदा क्षमताओं और उन्हें अप्रूव्ड करने कासमय, वायरस से लडऩे की क्षमता और टीके की कीमत के आधार पर कोई एक या संभवत: दोनों वैक्सीन कंपनियों को आने वाले कुछ महीनों में जबरदस्त मुनाफा दे सकती हैं।

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शुरुआती चरणों में सफल परीक्षण
वहीं बर्नस्टीन रिपोर्ट में दोनों कंपनियों के वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के परीक्षणों के डेटा के आधार पर दोनों कंपनियों को टीक की सुरक्षा और वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी (Developing Immunity) विकसित करने में भी सफलता मिली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तरह से चीजें अब दिख रही हैं, दोनों टीकों की दो खुराक 21 से 28 दिनों में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित करने लगेगी। वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की यह रिपोर्ट भारत के वैश्विक रूप से वैक्सीन देने की क्षमता के विषय में उम्मीदें जगाती है। रिपोर्ट के अनुसार, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया 2021 में 60 करोड़ (600 मिलियन) खुराक और 2022 में करीब 100 करोड़ (1 बिलियन) खुराक की आपूर्ति कर सकती है जिसमें से 40 से 50 करोड़ (400 से 500 मिलियन) खुराक 2021 तक अकेले भारत में उपयोग हो सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि सरकारी और निजी बाजार के बीच वैक्सीन का क्रमश: 55:45 के अनुपात में भागीदारी होगी।

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ये देसी कंपनियां भी बना रही वैक्सीन
सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा है कि वह अपनी वैक्सीन की कीमत 3 डॉलर प्रति खुराक रखेगी। लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट के अलावा कम से कम 3 कंपनियां और हैं जो भारत में वैक्सीन बनाने में जुटी हुई हैं। इन भारतीय फार्मा कंपनियों में ज़ायडस, भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई को सूचीबद्ध किया गया है। ये तीनों कंपनियां अपनी स्वयं की वैक्सीन पर काम कर रही हैं और वर्तमान में परीक्षण के चरण 1 और 2 में हैं।

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दुनिया के हर दूसरे बच्चे को सीरम की दवा
भारत बायोटेक, बायोलॉजिकल ई और कुछ छोटे खिलाडियों के बीच,भारत हर साल लगभग 2.3 बिलियन विभिन्न वैक्सीन की खुराक का उत्पादन करता है। सीरम इंस्टीट्यूट, ज़ायडस, भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई समेत कुछ अन्य छोटी कंपनियों के दम पर भारत सालाना करीब 200 से 300 करोड़ (2-3 बिलियन) अलग-अलग वैक्सीन और खुराक का उत्पादन करता है। वहीं सीरम अकेले 150 करोड़ (1.5 बिलियन) खुराक क्षमता वाले टीकों का विश्व स्तर पर सबसे बड़ा निर्माता है। वैश्विक स्तर पर हर तीन में से दो बच्चों को सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित वैक्सीन या खुराक मिलती है। बर्नस्टीन के अनुसार, भारत में कुल वैक्सीन बाजार का अनुमान वित्त वर्ष 2021-22 में 600 करोड़ (6 बिलियन डॉलर) का होने की उम्मीद है।

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