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सर्वाइकल कैंसर का सस्ता भारतीय टीका अगले साल

भारत सहित 194 देशों ने इसके निर्मूलन का लक्ष्य घोषित किया। पहला मौका जब दुनिया में किसी तरह के कैंसर के लिए ऐसा लक्ष्य घोषित किया गया।

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सर्वाइकल कैंसर का सस्ता भारतीय टीका अगले साल

सर्वाइकल कैंसर का सस्ता भारतीय टीका अगले साल

बड़ी संख्या में महिलाओं की जान लेने वाले सर्वाइकल कैंसर का सस्ता और प्रभावी भारतीय टीका अगले साल तक उपयोग के लिए तैयार हो सकता है। यह ऐसा कैंसर है जिससे टीके की मदद से आसानी से बचा जा सकता है।

दुनिया भर में भारत और चीन में ही इसके सबसे अधिक मामले होते हैं। लेकिन अभी सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में इसे शामिल नहीं किया गया है। संभवतः सस्ता भारतीय टीका आने के बाद इसे मुफ्त टीकाकरण के राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किया जाए।

इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (डब्लूएचओ) के सीनियर विजिटिंग साइंटिस्ट डॉ. रंगास्वामी शंकरनारायणन ने मंगलवार को कहा कि प्रस्तावित भारतीय टीका बहुत प्रभावी साबित हो रहा है। हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ इंडिया रिसर्च सेंटर की ओर से आयोजित वेबिनार में उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के अंत तक इसके उपलब्ध हो जाने की संभावना है। ट्रायल के दौरान सुरक्षा मानकों पर भी यह बहुत खरा उतरा है और कोई गंभीर दुष्परिणाम नहीं दिखा है। इंडियन एकेडमी ऑफ पिड्रिएटिक्स (आईएपी) के अध्यक्ष डॉ. बकुल पारेख ने कहा कि अभी लोग अपने खर्च पर यह टीका लगा रहे हैं।

पहली बार कैंसर निर्मलून का लक्ष्य घोषित

मंगलवार को पहली बार भारत सहित दुनिया भर के 194 देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के माध्यम से यह लक्ष्य घोषित किया है। सर्वाइकल कैंसर ऐसा पहला कैंसर है जिसके वैश्विक निर्मलून का लक्ष्य रखा गया है। यह कैंसर भारत में महिलाओं में दूसरा सर्वाधिक होने वाला कैंसर है। भारत में हर साल लगभग एक लाख महिलाओं में इसकी पुष्टि होती है और इनमें से 60% इस बीमारी की वजह से मारी जाती हैं।

‘90-70-90’ की रणनीति से निपटेंगे: स्वामीनाथन
डब्लूएचओ की चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर के निर्मूलन के लिए डब्लूएचओ ने ‘90-70-90’ की रणनीति बनाई है। इसके तहत लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक 90 प्रतिशत बालिकाओं का 15 साल की उम्र से पहले टीकाकरण कर लिया जाए। इसी तरह 70 प्रतिशत महिलाओं की जांच की जाए। तीसरा लक्ष्य है कि कैंसर की 90 फीसदी मरीजों का उपयुक्त इलाज और देखभाल सुनिश्चित की जाए। ऐसा किया गया तो वर्ष 2050 तक सर्वाइकल कैंसर के मामलों को 70% तक कम किया जा सकता है।

हर महिला को खतरा
एम्स नई दिल्ली में स्त्रीरोग विभाग की यूनिट हेड डॉ. नीरज बाटला ने कहा कि हर महिला सर्वाइकल कैंसर के खतरे की जद में है। उन्होंने कहा कि यह अनुवांशिक बीमारी नहीं है। ज्यादा संख्या में गर्भधारण करने वाली महिलाओं, कम उम्र में यौन संबंध शुरू करने वाली लड़कियों, कई लोगों से यौन संबंध बनाने वाली महिलाओं और दूसरे संक्रमण से प्रभावित होने पर इसका खतरा ज्यादा होता है।