JOINT HEALTH : ये दो काम नहीं करने से खराब हो जाएंगे घुटने

JOINT HEALTH : ये दो काम नहीं करने से खराब हो जाएंगे घुटने

Ramesh Kumar Singh | Publish: Aug, 15 2019 07:00:51 PM (IST) स्वास्थ्य

यदि आप अपने जोडों को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो यह Health News आपके लिए है। क्या आप जानते हैं कि जोड़ों के दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज कर दिया जाए तो परेशानी बढ़ सकती है। घुटने और कूल्हे में होने वाली समस्याओं का समय रहते इलाज न होने से ही हिप और नी रिप्लेसमेंट की नौबत आ रही है।

इसके पीछे की वजह भी जान लीजिए। फिजिकल एक्टिविटी से दूर रहना और दूषित खानपान का अधिक इस्तेमाल होना इस परेशानी को बढ़ा रहा है। इस तरह की जीवनशैली की वजह से जोड़ों की कार्टिलेज खराब हो जाती है जिसके उपर पूरा मूवमेंट निर्भर करता है। मोटापा अधिक होने की वजह से भी शरीर का पूरा भार घुटने और कार्टिलेज पर होता है जिससे वो जल्दी से घिसते हैं और परेशानी बढऩे लगती है। इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण ऑर्थराइटिस की समस्या भी है जो पूरी दुनिया में अपंगता का चौथा सबसे बड़ा कारण बनकर उभर रहा है। ऐसे में समय रहते जेड़ों में किसी तरह की परेशानी का समय पर इलाज कराया जाए तो हिप या नी रिप्लेसमेंट की समस्या से बचा जा सकता है।

क्या है ऑर्थराइटिस जानें
ऑर्थराइटिस Arthritis शब्द के का मतलब जोड़ है जिसकी मदद से व्यक्ति के हाथों-पैरों और कूल्हे में मूवमेंट होता है। जबकि राइटिस का अर्थ होता है वियर एंड टियर यानि जोड़ों का खराब हो जाना या उसकी कार्टिलेज का घिस जाना जिसे मेडिकल की भाषा में ऑर्थराइटिस कहा जाता है। इसमें जोड़ बढ़ती उम्र के साथ खराब होते हैं जिसे ऑस्टियोऑर्थराइटिस कहते हैं। जबकि रेमेटॉयड ऑर्थराइटिस जिसे गठिया कहा जाता है वे आनुवांशिक समस्या है और महिलाओं में अधिक पाई जाती है।

स्टेरॉयड से खराब होते हैं घुटने
जो लोग अपने मन से बुखार या किसी तरह के दर्द से राहत के लिए स्टेरॉयड युक्त दवा लेते हैं उनके कूल्हे तेजी से खराब होते हैं। इसके साथ ही आज के युवाओं में जिम को लेकर क्रेज है और कम समय में बेहतर बॉडी बनाने के लिए सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं उनके कूल्हे बहुत तेजी से खराब होने लगते हैं। इसके साथ ही घुटने या कूल्हें में खून पहुंचाने वाली नसों में किसी तरह का अवरोध पैदा होने या सिकुडऩ होने से भी कार्टिलेज खराब होती हैं और दर्द होता है।

इन जांचों से पता चलती है तकलीफ
घुटने या कूल्हे संबंधी समस्या को जानने के लिए सबसे पहले एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई कराई जाती है जिससे घुटने के आकार में किसी तरह के हुए बदलाव को देखा जाता है। इसके बाद कार्टिलेज की स्थिति को जांचा परखा जाता है। लोडिंग एक्स-रे मरीज को खड़ा कराकर घुटने की जांच की जाती है जिससे देखा जाता है कि भार पडऩे पर उसकी स्थिति क्या है। इन जांच रिपोर्ट के बाद रोगी का ट्रीटमेंट प्लान किया जाता है।

Knee Replacement के बाद नहीं होती तकलीफ
नी-रिप्लेसमेंट में घुटने की आसपास लिगामेंट की रिसरफेसिंग की जाती है। इसमें कोबाल्ट, क्रोमियम सेरेमिक से बने इंप्लांट का प्रयोग किया जाता है। नी-रिप्लेसमेंट में कार्टिलेज जहां होती है वहां दोनों तरफ आठ-आठ मिलीमीटर की कैपिंग की जाती है जिससे परेशानी खत्म हो जाती है। इसी तरह हिप रिप्लेसमेंट में कूल्हे की बॉल की जगह सेरेमिक या स्टेम टाइटेनियम बॉल इंप्लांट की जाती है जिसके बाद रोगी एक महीने में पूरी तरह ठीक हो जाता है। ऑपरेशन यानि रिप्लेसमेंट के बाद कोल्ड शेक की सलाह दी जाती है जिससे सूजन नहीं होती है। खास बात ये है कि ऑपरेशन के दिन ही रोगी अपने पैरों पर खड़ा होता है। जरूरी एक्सरसाइज और बातों का ध्यान रखते हुए एक महीने बाद पूरी तरह सामान्य हो जाता है जिसे परेशानी नहीं होती है।

इस कारण से आती कट-कट की आवाज
घुटने या कूल्हे से कट-कट की आवाज का आना इस ओर इशारा करती है कि परेशानी बढऩे लगी है। घुटने या कूल्हे से कट-कट की आवाज आने का मतलब है कि कार्टिलेज पूरी तरह खत्म हो गई है जिसके माध्यम से मूवमेंट होता है और अब दो हड्डियां आपस में मिल गई हैं जिसे मेडिकल की भाषा में बोन ऑन बोन कहा जाता है।

सिगरेट-शराब जोड़ों के लिए घातक
सिगरेट और शराब का इस्तेमाल करने वाले लोगों के घुटने और दूसरे जोड़ में तकलीफ का खतरा अधिक रहता है। जो लोग सिगरेट पीते हैं उन्हें एवैस्कुलर नेक्रोसिस की समस्या होती है जिससे कार्टिलेज खराब होती है और व्यक्ति का चलना फिरना मुश्किल हो जाता है।

खानपान पर देना होगा अधिक ध्यान
जोड़ संबंधी समस्या से बचाव के लिए पौष्टिक खानपान पर अधिक ध्यान देना होगा। खाने में दूध दही के साथ सभी तरह के मौसमी फल और हरी सब्जियों का प्रयोग बहुत जरूरी है। महिलाओं को इस ओर ध्यान देना चाहिए क्योंकि माहवारी बंद होने के बाद हड्डियां तेजी से खराब और कमजोर होती है। फास्ट फूड और बहुत अधिक तली भूनी चीजें भी सेहत को नुकसान पहुंचाती है।

Exercise फायदेमंद
हिप या नी-रिप्लेसमेंट के बाद रोगी की फास्ट रिकवरी के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज वार्मअप एक्सरसाइज और एंकल पंपिंग करना होता है। इससे घुटना और कूल्हा रिस्टोर होता है और सही पोजीशन में आने के बाद सामान्य काम करता है। जिन लोगों को इस तरह की तकलीफ है वे समय रहते डॉक्टरी सलाह के बाद नियमित एक्सरसाइज करें तो इस दर्दभरी परेशानी से बचा जा सकता है।

एक्सपर्ट : डॉ. अनुप झुर्रानी, ज्वाइंट एंड हिप रिप्लेसमेंट एक्सपर्ट
एक्सपर्ट : डॉ. आशीष शर्मा, फिजियोथैरेपिस्ट

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