
Know how love hormone affects your health
कहते हैं इश्क और मोहब्बत सिर्फ दिल से जुड़ी चीज है, इसका दिमाग या शरीर से कोई लेना- देना नहीं है। लेकिन बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि प्यार करने से इंसान के पूरे शरीर पर अलग- अलग असर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल लगाने से शरीर पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव होते हैं।
कैसे होता है शरीर पर प्यार का असर-
प्रेम होने पर व्यक्ति के शरीर पर क्या असर पड़ता है, यह जानने के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ने स्केनिंग तकनीक से दिमाग पर होने वाले असर को जांचा और पता चला कि:
प्रेम में पडऩे पर दिमाग में निर्णय लेने का काम करने वाला अग्रिम कोर्टेक्स बंद हो जाता है। कोर्टेक्स तभी बंद होता है, जब संबंधित व्यक्ति को उसके सर्वाधिक प्रिय व्यक्ति की फोटो दिखाई जाए।
प्यार करने वालों के दिमाग में डोपामाइन रसायन बहुत ज्यादा हो जाता है। डोपामाइन खुशी, दुख और लत आदि अनुभवों से जुड़ा होता है। डोपामाइन अपने साथी की ओर आकर्षित करता है।
एड्रेनलिन हार्मोन को प्यार का रसायन भी कहते हैं। प्रेम होने पर इसका स्त्राव भी होता है, जो दिल की धड़कने बढ़ाने और हथेलियों में पसीना आने की वजह होता है। इसकी वजह से दिल की गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।
प्यार की वजह से तनाव कम होता है और फील गुड हार्मोंस जैसे डोपामाइन, नॉन एपिनेफ्रिन के साथ फिनाइल इथाइल एमिन हार्मोंस का सीक्रेशन होता है, जो खुशी देता है।
हार्मोन के सीक्रेशन से रक्तचाप सामान्य रहता है और कार्डियक फंक्शन अच्छे से काम करता है।
कभी हुए फैटी तो कभी क्रिएटिव
प्यार होने के बाद व्यक्ति सहजता से भोजन करता है। बाहर का भोजन करना और व्यायाम ना करना उसकी आदत बन जाते हैं। सर्वे में अधिकांश लोगों ने स्वीकारा कि प्रेम होने के बाद उनकी भूख और वजन दोनों बढ़े।
प्रेमी युगलों पर शोध करने के बाद पाया कि प्यार करने पर व्यक्ति की सोच बदलती है। उसका दिमाग उसे कलात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करता है।
शोध में पता चला कि प्रेमी जोड़े जब अपने साथी का फोटो देखते हैं तो उनके दिमाग का आनंद उत्पन्न करने वाला हिस्सा जागृत हो जाता है।
प्यार का कैमिकल फंडा-
प्रेम होने पर शरीर में कई रसायनिक बदलाव होते हैं, जिनका असर दिल व दिमाग पर होता है। व्यक्ति क्रिएटिव करना चाहता है। प्यार होने पर दिमाग में कैटाकोलामिन्स बढ़ते हैं, जिससे व्यक्ति को खुशी की अनुभूति होती है। कैटाकोलामिन्स कम होने पर व्यक्ति दुखी होता है।
Published on:
07 Sept 2020 10:47 pm
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