
जन्म के छह माह बाद बच्चे का पहला दांत आता है और ढ़ाई साल की उम्र तक बीस दांत आ जाते हैं। सात साल की उम्र में दांत टूटने शुरू होते हैं और बारह साल की उम्र तक दूध सभी दांत टूट जाते हैं। एक साल की उम्र के बाद भी बच्चा मां का दूध पी रहा है तो दांतों में सडऩ की तकलीफ होती है। ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए एक साल की उम्र के बाद मां का दूध नहीं पिलाना चाहिए। छह साल की उम्र में बच्चे की पहली पक्की दाढ़ आ जाती है। जिन बच्चों के दांत टेढ़े मेढ़े आते हैं उनका इलाज नौ साल की उम्र में शुरू हो जाना चाहिए। मायो फंक्शनल टेक्नीक से इसका बेहतर इलाज संभव है। बच्चों का दूध का दांत किसी वजह से अचानक टूट जाए तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। टूटे हुए दांत से दूसरे दांत को संक्रमण होने का खतरा रहता है।
बच्चों में हर्पिटीक जिंजिवाइटिस खतरनाक
चार से छह साल की उम्र के बच्चों में हर्पिटीक जिंजिवाइटिस की समस्या भी पाई जाती है। इसमें दांत में तकलीफ की वजह से बच्चे को 104-105 डिग्री तेज बुखार रहता है। बच्चे के होंठ और मसूड़ों पर लाल चकते बनने लगते हैं। भूख लगनी बंद होने के साथ उल्टी, दस्त के साथ मुंह के भीतर छाले बन जाते हैं जिससे बच्चे का खाना पीना बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को डेंटिस्ट के साथ सपोर्टिव थैरेपी देते हैं जिससे उसकी स्वास्थ्य संबंधी समस्या अधिक न बिगड़े।
बार-बार मुंह में अंगुली न लगाने दें
बच्चों के जब दांत निकलने लगते हैं तो वे अपनी अंगुली बार-बार मुंह के भीतर ले जाते हैं। बार-बार मुंह में अंगुली ले जाने से दांत में संक्रमण का खतरा बढऩे के साथ का आकार बदल सकता है। कई बार बच्चे दांत को अंगुली से कसकर दबाते हैं जिससे दांत की बनावट पर फर्क पड़ता है। ऐसे में दांत निकलने पर बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि वे बार-बार अंगुली न लगाए। इससे बचाव के लिए रबर की माउथ कैप आती है जिसे लगाया जा सकता है।
डॉ. संदीप टंडन, हेड पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री, गर्वमेंट डेंटल कॉलेज
Published on:
23 Apr 2018 02:17 pm
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