
जानिए कैसे हार्ट को प्रभावित करती है नींद की कमी, देर रात तक स्क्रीन देखते रहना बढ़ाता है जोखिम
क्लीवलैंड क्लिनिक के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि फेफड़ों के कार्य को ध्यान में रखने के बाद भी जोखिम बना रहता है, ऐसे में वैज्ञानिक यह सुझाव देते हैं कि नींद से संबंधित हाइपोक्सिया एट्रियल फाइब्रिलेशन जोखिम को बढ़ाता है। यदि आपको नींद नहीं आती, या फिर आप देर रात तक स्क्रीन पर रहते हैं, तो आपके हार्ट की सेहत बिगड़ सकती है। स्टडी में सामने आया है कि स्लीप एपनिया (एक नींद विकार) और एट्रियल फाइब्रिलेशन (एक सामान्य हृदय रिदम विकार) एक दूसरे से प्रभावित होते हैं।
क्या है एट्रियल फाइब्रिलेशन
एट्रियल फाइब्रिलेशन एक अनियमित और अक्सर बहुत तेज हृदय ताल है, जो हृदय में रक्त के थक्के का कारण बन सकता है। असामान्य रूप से तेज हृदय गति के कारण रक्त प्रवाह खराब हो सकता है और स्ट्रोक, हार्ट फेल और अन्य हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे हुई स्टडी
अध्ययन से पता चला कि 5 प्रतिशत रोगियों में नींद के अध्ययन के पांच साल के भीतर एएफआईबी का निदान किया गया था, जबकि उनका समूह काफी युवा था। शोधकर्ताओं के अनुसार, स्लीप एपनिया की नियमित जांच और इलाज से एट्रियल फाइब्रिलेशन विकसित होने की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है, खासकर उन लोगों में जो पहले से ही उच्च जोखिम में हैं।
क्या होता है हाइपोक्सिया
अब शोधकर्ता नींद की अव्यवस्थित श्वास, जिसमें स्लीप एपनिया और नींद से संबंधित हाइपोक्सिया शामिल हैं, को एएफआईबी विकास से जोड़ने वाले तंत्र को बेहतर ढंग से समझने के लिए भविष्य के अध्ययन की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा श्वास संबंधी उपचारों के बारे में भी पता लगाया जा सकता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
20 Nov 2023 06:05 pm
Published on:
14 Nov 2023 09:34 am
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